प्रतिदान

)प्रतिदान

राघव मुख्य ऑफिस के दरवाजे पर ठिठक गया | इस ऑफिस को ज्वाइन करने के बाद, पहली बार, वह ऑफिस के इस हिस्से में आया था| दरवाजे से काफी हट कर बने केबिन के बाहर लटक रही तख्ती पर सोहनलाल, यू.डी.सी लिखा था| सोहनलाल घाघ किस्म, मोटी चमड़ी का आदमी था| आठ साल में दो प्रमोशन पा चुका था| इधर राघव पाँच साल से लाईब्रेरी असिस्टेंट के पद पर ही टिका था| हाँ, इस साल से हिन्दी विभाग को संभालने की जिम्मेदारी उसके हिस्से आई थी|
आगे बढ़ राघव सोहनलाल के केबिन में दाखिल हो गया| माचिस की तीली में रुई लपेट सोहनलाल अपने कान कुरेद रहा था| राघव को देखते ही सोहनलाल की आँखो में कुछ चमका," अरे!! राघव बाबू!! आज इधर की राह कैसे? मुझे तो लगा आप जैसे बड़े लोगो को,  हमे ही जाकर सलाम करना पड़ेगा | "
सोहनलाल का यह कटाक्ष राघव को कुछ देर अटका गया फिर हिचकते बोला,  "सर, वो एल.टी.सी के लिये अर्जी दी थी, पैसे जल्दी सेंक्शन हो जाते तो!!! इस बार पत्नी-बच्चों को......"
सोहनलाल राघव की बात काटते बोला,"कब लगायी थी अर्जी?"
  "हफ्ता हो गया,सर"|
   "हफ्ता ही हुआ न!!!! तुम लोग न, बड़ी जल्दी में रहते हो| चलो, मान लो, साहब से बोलबाल के जल्दी सेंक्शन भी करवा दी| तो हमारे हाथ क्या लगेगा? निल बटा सन्नाटा| "
सोहनलाल के चेहरे पर चिपक रही काईयापन की परत मोटी हो रही थी| राघव का मुँह लटक आया| सोहनलाल ने पैंतरा बदला|
"भई सुना, हिन्दी विभाग भी तुम्हारे जिम्मे आ गया हैं| "
"जी सर"|
"अगले महीने हिन्दी पखवाड़ा शुरू हो रहा हैं| मालूम पड़ा कि बड़ी जोरदार तैयारी चल रही हैं|"
"जी सर, अभी तो कई काम रह गये हैं| स्टेशनरी वैगरह भी लानी बाकी हैं|'
"अब ऊपर वाले इतने मेहरबान हैं तो तुम भी थोड़ी समझदारी दिखाओ भई| बड़े साहब का ध्यान भी तो हमे ही मिल कर रखना होगा| एक बार उनकी नजरो में चढ़ गये | फिर तो समझो चाँदी ही चाँदी | समझ रहे हो न|"सोहनलाल पान की जुगाली करते बोला|
"जी सर"|
"कहाँ जाना हैं वैसे एल.टी.सी में?"
"सर,साउथ का बन रहा था"
"सुना वहाँ की सिल्क साड़ियाँ बहुत बढ़िया होती हैं"
अबकी राघव के कान खड़े हुये, स्वर में भी उत्साह आया,"जी जरूर सर! मैंने तो पहले ही मन बना लिया था,एक साड़ी मैडम और एक साड़ी बड़ी मैडम के लिये लेता आऊँगा|"
"वाह गुरु, बड़ी जल्दी सीख रहे हो|" सोहनलाल फक्कक से हँस दिया|
इस बार सोहनलाल के चेहरे का घाघपन राघव के चेहरे पर भी चिपकने लगा था|

अंजू निगम
देहरादून

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top