रंग

रंग

ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली  बहू "| ये शब्द कोड़े की तरह उसकी मन की पीठ को लहुलूहान करते रहते | पर अब इस शब्द को सार्थक करते "काली"की तरह ही बुराई को समाप्त करने के लिए वो उठ खड़ी हुई हैं| और इन्हीं शब्दो को उसने अपना हथियार बना लिया हैं|

अंजू निगम
देहरादून


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