सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी अपने माँ-बाप के पास ही पहुँच जाती तो उसके वजह से किसी को भी दुःख न पहुँचता| तब चाचा की स्नेहिल बाते मलहम का काम करती|
" चाय तुने कितनी चढ़ा दी? सारे मोहल्ले को पिलानी हैं क्या?" चाची का तीखी स्वर आता|
" चाची मेरे सर का दर्द काफी बढ़ गया इसलिये अपने लिये बड़ा कप बना लिया है|" सुमि असहाय सी बोली|
माँ होती तो अभी सर दाबने बैठ जाती| सुमि की आँखे आँसुओ से भीग उठी|
" ठीक हैं, ठीक हैं| हर समय बेमौसम अपने टसुये न बहाया कर" चाची चिढ़ कर बोलती|
सुमि जल्दी से अपने आँसु पोंछ डालती हैं|
" ठीक तो कहती हैं चाची| मेरे आँसु बहुत कीमती हैं| इन्हें युँ ही जाया छोड़े न होना चाहिये|" सुमि अपने को ही संभालती हैं|
लाख कोशिश रहती सुमि की कि कोई गल्ती न होने पाये पर जाने कैसे चाची ढुंढ कर उसकी गल्ती निकाल ही लेती|उसकी सारी मेहनत एक ही बार में तिरोहित हो जाती| सुमि को यही लगता रहा इतने साल कि वो लापरवाह, कामचोर ही हैं| जिसे केवल गल्तियाँ करनी ही आता हैं|
बुटीक जब खोली तब ही उसे लगा कि हाँ, उसका भी कोई वजूद हैं| वो अपने'नाम' के सहारे खड़ी हैं|
बुटीक की कितनी ही परेशानियाँ उसने अपने ही दम पर हल की थी| हाँ, बुटीक खोलते समय चाचा ने हर संभव मदद की कोशिश की| ' कोशिश ' इसलिये की चाची की कितनी ही कर्ण भेदी बातो के परे चाचा ने सुमि का साथ दिया था|
हद से बाहर होती परेशानियाँ वो चाचा से ही शेयर करती और अपने को खुशनसीब समझती कि"कोई तो हैं जो बिना अहसान जताये उसकी सुनता हैं"|
बुटीक का काम अच्छा होता था| सो, सुमि का काम फैलने लगा| सुमि में हजारो नुक्स निकालने वाली चाची जाने क्यों सुमि के फैलते काम से खुश ही रहती|
सुमि के बढ़ते काम के साथ उनके घर की महँगाई भी बढ़ती जाती|तब सुमि को पकड़ वो सारे राशन का हिसाब गिनाने बैठ जाती| चाचा के कानो में ये बात पड़ती तो वो पुरजोर इसका विरोध करते|पर जाने क्यों चाची की महाकाया के आगे वो झुक जाते| यही सोच कर की घर में कोई अशांति न हो| क्योंकि इसका सारा दोष उस अभागी लड़की पर आता|अपने पापा की ये चुप्पी उनकी दोनो लड़कियों को अखरती|
सुमि को चाची का इशारा समझने में देर न लगती और वो आते महीने का पूरा राशन भरवा देती| चाची गदगद् हो जाती|
चाची अपने मायके गयी थी और उनके पीछे चाचाजी ने वकील बुला भेजा था|
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