एक रंग

१)  एक रंग ये भी

उस पहले तल्ले में चार फ्लैट आमने-सामने बने थे|हमारे अलावा पीटर,नायर,जोशी का परिवार| सभी एक-दूसरे के सुख-दुख,तीज-त्यौहार में पूरा उत्साह दिखाते| किसी को परिवार से अलग रह कर भी परिवार की कमी नहीं खलती|
  मेरे सामने के फ्लैट में रहते नायरजी के यहाँ नयी बहू आई |एकदम आधूनिक रंगो में रंगी|
     दीवाली पास आ रही थी और हम सब उत्साह में भरे तैयारी कर रहे थे| कंदीले, झालर सज गये थे|
  दीवाली से चार दिन पहले जोशीजी की तबीयत अचानक खराब हुई| अस्पताल पहुँचने से पहले वे हमे अलविदा कह गये| उनके परिवार के साथ ये हमारे लिए भी एक गहरा झटका था| उनका बेटा वैभव अभी छोटा ही था | रिश्तेदारो के आने से पहले हम सबने मिल कर अपनी जरूरी जिम्मेदारी संभाल ली| जोशीजी अंतिम बार विदा हो गये|हम सबने भी इस बार दीवाली न करने का सांझा फैसला लिया|पर सगुन तो करना ही था| पुजा और हल्की दीया-बाती कर सोचा"जोशी भाभी के पास ही बैठे|रिश्तेदार तो थे पर हमारा भी भावनात्मक सहारा मिल जाता|
    उनके घर का दरवाजा नायर जी की बहू ने खोला|आज वो आधुनिक लड़की सादगी ओढ़े थी|बड़े सलीके से उसने ही हमे अंदर बैठाया|
  फिर बोल उठी,"आज आप सबके सामने, दीवाली के दिन मैं ये सकंल्प उठाती हूँ कि जब तक वैभव अपने पैरो पर खड़ा नहीं हो जाता,मै शैक्षिक स्तर पर उसकी हर संभव मदद करूँगी|"
   उस आधुनिक लड़की के प्रति हमारा सर श्रृद्धा से झुक गया| हम तो आज में ही उलझे रहे और इस लड़की ने उसके कल को दीवाली की जगमगाहट से भर दिया था|
     
   अंजू निगम
   देहरादून

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