अनाम
राशि बहुत देर तक लॉबी में बैठी रही| डॉक्टर ने उसे ग्यारह बजे बुलाया था| पर वो एक घंटे पहले ही आकर यहाँ जम गयी| मन शुन्य था|
यूँ तो समय के कितने थपेड़ो ने उसकी पीठ को छलनी किया, पिछले साल माँ-बाप का साया भी नहीं रहा पर वो हमेशा ही मन को झाड़-बुहार कर फिर उठ खड़ी होती| मगर इस बार ये थपेड़ा ढीठ बना उससे चिपका जा रहा था| सुबह आँख खुलते और रात सोने से पहले तक| होता ही न!! इस बार अभय का लौह स्तंभ उससे छिटक गया था| सारे सहारे एक एक कर छुट रहे थे और वो अनाथ सी चौराहे पर खड़ी, एक राह खोज रही थी अपने लिए|
राशि की निगाह डॉ. मृदूला के चैम्बर का दरवाजा बार बार नाप रही थी| ठीक ग्यारह बजे ही उसे बुलवाया गया | राशि को आज डॉक्टर का चेहरा कुछ ज्यादा सख्त लगा| शायद उसकी अपनी मनोदशा उस पर हावी हो रही थी|
" आओ, बैठो राशि!!! आज तुम्हारे साथ अभय नहीं आया| उसे साथ आना चाहिए था|"
" वो आने के लिये कह रहे थे... पर.. मैंने ही मना किया|" राशि नर्वस थी, झुठ का आवरण बहुत झीना हो उठा|
" आता तो अच्छा रहता| तुम दोनो अभी भी बंधे हो एक दूसरे से!!"डॉक्टर मृदूला दोहरी भूमिका में थी|
"अभय पार्किंग में ही खड़े हैं| मैं बुला लेती हूँ|"थोड़ा ठहर कर राशि ने ही बोला|
अभय का चेहरा शांत था | पार्किंग में वो था ही इसलिये की अभी भी राशि की तरफ का एक जिम्मेदारी भरा अहसास उसमें बाकी था| और राशि भी एक उम्मीद ओढ़े बैठी थी कि शायद अब भी अभय वापस आ जाये| पर.......
दोनो की चुप्पी तोड़ते डॉक्टर मृदूला ने ही स्थिति साफ करते हुये बोलना शुरु किया, "मैं लंबी चौड़ी भूमिका नहीं बांधूगी| पर हाँ, राशि के रिपोर्ट ठीक नहीं आये हैं| उसकी दोनों फ्लोमिन ट्युब ब्लॉक हैं| ऐसी हालात में वो कनसिव नहीं कर पायेगी| मुझे मालूम है, यह बड़ा आघात हैं,पर जीवन यहीं नहीं रुकता|" थोड़ा ठहर कर उन्होंने दोनों के चेहरे पढ़े फिर बोली," तुम दोनो चाहो तो आई.वी.एफ अपना सकते हो| इसके लिये तुम्हें किराये की कोख लेनी पड़ेगी| हाँ, यदि ये फैसला मन को तैयार नहीं कर पाता| और तुम दोनों चाहो तो अनाथाश्रम से एक बच्चा गोद ले उसे नया जीवन दे सकते हो| फैसला तुम्हारें हाथों में हैं|'
अभय ने राशि की ओर देखा| उनका रिश्ता अंतिम साँस ले रहा था| ये अंतिम आघात भी था राशि को तोड़ने के लिये| पर उसे देख ऐसा लग रहा था मानो अब तक जिस गहरे पानी ने उसका दम घोंट रखा था, वो धीरे धीरे बह गया हैं| स्थितियाँ धुल कर साफ हो गई थी|
महीनों का मानसिक संताप पल भर में गायब हो गया|अब उसे खुद के लिए निर्णय लेना आना चाहिए, "मैं बच्चा गोद लूँगी| ईश्वर यही चाहते होगें कि एक अनाम को मेरा नाम मिले|' राशि का चेहरा खिल रहा था| ममत्व से| उसका अनाथ मन किसी और बेसहारा के मन से जुड़ ही लेगा अब|
अंजू निगम
देहरादून
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