स्पर्श
आंधी का प्रंचड आवेग सब कुछ तहस नहस करने को तत्पर था| लग रहा था आज ये अंधड़ धरती का सारा सौंदर्य हर लेगा|
सिमोना भी मन में उठ रहे ऐसे ही तुफान से जूझ रही थी| क्या इसकी इति उसके असित्व को लील लेगा? कितनी मेहनत से आज वो अपने को उस स्थान पर खड़ा कर पायी थी,जहाँ के कितने केवल सपने देखते होगे? समीर के सारे तर्क सिमोना ने खारिज कर दिये थे
दोनो की शादी को पाँच साल होने को आये| माँ-सास ने कई बार उसे घेरा,"उम्र अधिक हो जाने पर माँ बनने में कई दिक्कतें आती हैं| फिर हर काम समय पर हो तो क्या बुरा हैं|" पर सिमोना अपनी बात पर अडिग रही| मगर इस बार डाक्टर ने सख्त हिदायत दी कि इतने ऑबोरशन उसकी सेहत के लिए ठीक नहीं और अगर सिमोना अपनी बात पर अडिग रही तो वे ये केस अपने हाथ में नहीं लेगे|
"क्या जी का जंजाल बन गया!!! इस साल तो उसका प्रमोशन होना तय हैं| रुतबा और पैसा दोनो| पर बीच में ये मुसीबत कहाँ से आ टपकी!! समीर और आने वाली संतान को उसने जी भर कर कोसा| उसके साथ की कितनी दोस्तो का कैरियर इसी घर-गृहस्थी के फेर की बलि चढ़ गया| मगर वो ऐसा कुछ नहीं होने देगी|
खीज और उलहाना से भरे महीने बीत गये| एक नया जीव इस दूनिया में आया| जब नर्स ने उस नन्हे जीव को सिमोना की गोद में रखा और उस जीव ने अपनी जननी की उगँली कस कर थाम ली, उस अहसास से उसका सारा दर्प वही बिखर गया|
आज एक माँ का भी तो जन्म हुआ था|
अंजू निगम
देहरादून
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