विक्रेता
"कैसा बुखार है राशि का?" सुनील चितिंत सा बोला।"
"अभी भी सौ बना हुआ है। नॉर्मल हो ही नहीं रहा।"रुचि भी परेशान थी।
"दवा दे रही हो न समय पर ?"
"आपको मालुम है न राशि के लिए मैं कितनी पॉसेसिव रहती हूँ!!" रुचि को सुनील का ऐसा कहना अखर गया।
"पता नहीं। डाक्टर तो इतने नामी है। भीड़ लगी रहती है पर दवाईयाँ इतनी लिख दी और सारी मँहगी!!! कल हाल बताया तो दो चार टेस्ट और करा लेने को कह दिया। साथ में पेथोलॉजी लैब और केमिस्ट के नाम तक लिखवा दिये कि यहींं से टेस्ट करवाये।" सुनील ने एक कड़वाहट रुचि के सामने परोसी।
"हम दूसरे डाक्टर से सेंकड ओपीनियन ले सकते हैंं।" रुचि ने अपना पक्ष रखा।
"सब जगह का यही हाल हैंं। उनके अपने पेथोलॉजी और केमिस्ट बंधे होगेंं। विरले ही मिलेगे जो वाकई अपनी सेवा देते हैंं। जब डाक्टर ने नाम गिनाया तो यही लगा कि सामने डाक्टर नहीं व्यापारी बैठा हो।"सुनील आहत स्वर में बोला।
"अभी तो यह दवाई ले आता हूँ।" उठते हुये सुनील ने कहा। "इतनी दवाईयों ने सारे महीने का बजट गड़बड़ा दिया," सुनील थके मन से सोचता केमिस्ट की दुकान के आगे खड़ा हो गया।
" इन दवाओं की तो एक्सपायरी डेट निकल चुकी है, दो महीने पहले। आपने वह पत्ते मुझे बेच दिये?"एक लड़का आकर दुकानदार को आढ़े हाथों लेता बोला।
"मुझसे ली है तो दिखाओ बिल।"दुकानदार अपने को बचाते हुये बोला।
"बिल देते ,तब तो होता न। बिल देने के नाम पर सौ बहाने बनाते हो। दवा खाते ही मेरे भाई को उल्टी शुरु हो गयी। उसे कुछ हो गया तो पुलिस में शिकायत करुँगा।" लड़का तैश में था।
"यहींं से दवा ली यह कैसे साबित करोगे?" दुकानदार अब घाघपने पर उतर आया।
"ये नहीं साबित कर पायेगा मगर मैं तो कर सकता हूँ। वो तो पैनल के डाक्टर को दिखाया था इसलिए बिल लेना जरूरी हो गया। नहीं तो मैंने जिसे भेजा था दवा लेने, उसे भी तुम ऐसे ही टरका रहे थे। दवा खाने के पहले मैंने एक्सपायरी देख ली थी क्योंकि तुम्हारी बहुत शिकायत मिल रही थी। बात सही निकली। दो दवाई तो दस दिन पहले एक्सपायरड है। तुमने भले ही खुब कच्चे बिल बनाये हो, केस तुम्हारे खिलाफ पक्का बनाता हूँँ।"कहते ड्रग इंस्पेक्टर अपनी टीम को फोन करने लगे।
सुनील की आँखो के आगे डॉक्टर की तस्वीर घुम गयी।
अंजू निगम
देहरादून
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