किरायेदार
"अरविंद जी, इस बार भी आपका किराया अभी तक नहीं आया !!" मिसेज शर्मा बहुत उखड़ गयी थी।
" जी, मैं दे देता पर इस बार भी तनख्वाह दस तारीख तक आयेगींं, नहीं तो मैं आपको शिकायत का मौका ही नहीं देता।" अरविंद ने अपनी मजबूरी गिनायी।
"कमरा देने से पहले आपको कह दिया था कि मेरे हाथ में पहली तारीख को किराया आ जाना चाहिए ।"अरविंद की बात को परे धकेलते मिसेज शर्मा बोली।
"जी, दस तारीख को तनख्वाह मिलते ही पहले आपका किराया दूँगा।"बहुत नरमी से अरविंद ने फिर अपने को दोहराया।
"आप लोग घर लेते समय तो बड़ी बड़ी बातें करते है। बाद में कोई न कोई बहाना लगा, आधा महीना निकाल देते है। हर महीने मुझे पैसे माँगना अच्छा नहीं लगता।" कहते मिसेज़ शर्मा गुस्से में वहाँ से चली जाती हैंं।
"लगता है यहाँ ज्यादा दिन नहीं टिक पायेगे?"अरविंद अंदर आकर अपनी पत्नी पूनम से कहता है।
" कौन सा हम किराया दिये बिना भागे जा रहे हैंं।अब हर शहर में सबके घर तो होते नहीं। किरायेदार न हुये सड़क किनारे खड़े भिखारी हो गये, जिसे जब चाहो दुत्कार दो।" पूनम भी उखड़े मन से बोली।
" अरे धीरे बोलो। कहींं सुन लिया तो आज ही सामान न बांधना पड़े। तुम्हारा गला भी पंचम सुर ही बजाता हैंं।"अरविंद खीजते हुये बोला।
" तुम रहो डर कर। भई, किरायेदार तो हमने भी रखे हैंं पर कभी उनको नीचा नहीं दिखाया। न हमें, न उनको कभी शिकायत हुई।"पूनम उसी सुर में बोली।
"तुम्हारा भी वक्त बेवक्त मायका पुराण शुरु हो जाता है। अब थोड़ी शांति रखो। वैसे ही मन खराब हो गया।"अरविंद तल्ख होकर बोला।
शाम को अंकल ने आकर जब उनका दरवाजा बजाया तो अरविंद हड़बड़ा गया। दरवाजा खोलते ही बोला," नमस्ते अंकल!!आप आईये न अंदर!! "
"फिर कभी आऊँँगा बेटा। अभी तो यही कहने आया था कि तुम्हें अगर दस तारीख तक किराया देने की सुविधा हो रही है तो दस से दस तारीख का ही बांध लो। आज जब बेटी ने भी वही बात दोहराई जो पूनम ने कही तब समझ आया कि वाकई हर शहर में सबके घर नहीं बने होते पर पूनम बेटी को यह भी जान लेना चाहिए कि मकान मालिक भी हर जगह एक से नहीं होते। कुछ मेरे जैसे भी होते है।"कहते मिस्टर शर्मा ने स्नेह से अरविंद का कंधा थपथपा दिया।
अंजू निगम
देहरादून
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