मनहरण घनाक्षरी

रात आज जाग रही, दिन देखो खोया रहा
         सपने आँखो में सजे ,लाज आज नाता है।

ओढ़ी है चूनर झीनी, चेहरा सुर्ख हो रहा
          पिया संग प्रीत की, भाव अब आता है।

रिश्ते कुछ छूट गये, नये नाते बन रहे
           भीगे भीगे दो नयन ,मन मेरा रीता है।

दो कुलों की लाज बनो, सीख पल्ले बांध रही,
            दुआ यहीं संग मेरे, विदा गीत गाता है।

अंजू निगम 
देहरादून

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top