कविता

इस उम्र का प्यार

इस उम्र के प्यार से भरे है जज्बात
बस खामोशी सुनती है सब
और शब्द बहते है आज
गिरती बारिश की बूँदो को
चलो छु ले आज साथ हम
सुबह की ठंडी छुअन को
चाय की दो प्यालियों  में
 साथ साथ भर ले हम।

इस उम्र के प्यार से भरे है जज्बात
सतरंगे आसमाँ  में
पंतग के दो पेंच लड़ा ले
या मौसम के हर रंग को
अपने में बसा ले हम।
साथ बैठ कर चलो
कुछ बीते लम्हें साथ
समेट ले हम।

इस उम्र के प्यार से भरे है जज्बात
जब बालो में भर रही चाँदनी
सिलवटों में अटा मेरा चाँद
उड़ जाये वक्त के कुछ पंख
तब भी हाँ तब भी
अपने साये की छुअन को 
सहलाते रहे  हम।


इस उम्र के प्यार से भरे है जज्बात
उदासी की फैली चादर
लपेट कर रख दे बस
वक्त का क्या है
रेत सा फिसलता है
आज तो एक दूजे के साथ का 
कुछ जश्न मना ले हम


इस उम्र के प्यार से भरे है जज्बात
साथ साथ इसे जी ले आज
साथ साथ इसे जी ले आज

अंजू निगम
देहरादून

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