प्रहरी

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किशन बकरियाँ चराते दूर निकल आया था| वहाँ से पाकिस्तान सीमा करीब पाँच किलोमीटर दूर होगी| ये "नो मैन्स लैंड" से सटा इलाका था और कोई गतिविधि न के बराबर थी| पर उस दिन किशन ने वहाँ कई बंकर बने देखे जिसमें पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे थे| किशन सजग था और उसने तुरंत इसकी सुचना भारतीय सेना को दी| ये ३ मई की बात थी |गर्मी का प्रचंड आवेग था|
     भारतीय सेना हरकत में आ गई|
"एक पेट्रोलिगं पार्टी तुरंत रवाना की जाये" युनिट अफसर का आदेश आया|
दो दिन बाद का माहौल अलग रंग में रंगा था| पाकिस्तानी इरादे साफ हो चले थे|कारगिल भेजी गई टीम के कई सैनिकों को बंदी बना पाँच सैनिकों की हत्या कर दी गई थी| पाकिस्तानी खेमे से बमबारी कर भारतीय सेना का कारगिल में इकट्ठा गोला बारूद नष्ट कर दिया गया| सीमा में तनाव बढ़ गया था| छुट्टी पर गये सैनिकों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई|
  मंगत छः महीने की "हार्ड एरिया"की ट्रेनिंग ले दो दिन पहले ही घर आया था|सुबह डाकिया छुट्टी रद्द होने की डाक दे गया था| घर में खींची रौनक मायूसी में बदल गयी थी|
"मेरे लाल को देश सेवा का मौका मिला है, माँ का लाल दूजी माँ की लाज बचाने जा रहा है ,मेरे लिये इससे ज्यादा फक्र की और क्या बात हो सकती है| जा मेरे लाल, तेरी माँ की आँखो में एक कतरा आँसू का नहीं उतरेगा|" संतो के स्वर से ओज टपक रहा था|
   पंजाब रेजीमेंट की बटालियन जब सीमा पर पहुँची ,सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया था| कारगिल, द्रास, मुश्कोह में घुसपैठिए देखे गये थे| पाकिस्तानी सेना बड़ी तादाद में मौजूद थी, तकरीबन ५००० सैनिक|
     इधर भी आदेश था कि बड़ी संख्या में बटालियन इकट्ठी की जाये| सो, करीब ३०,००० भारतीय सैनिकों की फौज तैयार की गई| २६ मई को शुरू हुआ युद्ध
करीब दो महीने चला| 
  "बटालियन, अपना हौसला बनाये रखे| हम आपकी मदद के लिए वायुसेना के तीन  फाइटर प्लेन बुलवा रहे है|" कामांडिग ऑफिसर की आवाज ने सैनिकों में जोश भर दिया|    
"युद्धभूमि की उँचाई और हालात की गंभीरता को देखते हुये तुरंत मिग २७ और मिग २९ को भेजे जाने के आदेश दिये जाये |"सेना के कंमाडर-इन-चीफ का    वायूसेना के उच्च अधिकारी को फोन जाता है|
  इन दो विमानो के अलावा आर-७७ ने भी अपना कमाल दिखाया|                                            
अततः भारतीयों ने "टाइगर हिल्स" पर अपना परचम लहरा ही दिया और पाकिस्तानी सेना को पीछे धकेल दिया|  ये युद्ध भारतीय सैनिकों की शुरवीरता के लिए इतिहास के सुनहरे अक्षरो में दर्ज हुआ| 
   आज मंगत की माँ अपने पूत की अंतिम यात्रा को खड़ी है| चेहरा गर्व से तना है| उसके कानो में मंगत के शब्द बार-बार गूंज रहे है," माई तु फौजी की माँ है| तुझ पर आँसू अच्छे नहीं लगते |"

अंजू निगम
देहरादून

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