कान्हा

कान्हा


कान्हा

मोरपंखी का ताज बना,सजा सिरमौर,
कानो में कुड़ल सजे, बना कर्ण श्रृंगार|

नयन शीतलता भरे, रुप सांवरा-सलोना,
माथे पर तिलक सजे,चमके ललाट विशाल|

पैरों में पायल बाजी, बना पद हार,
रुन-झुन पायल झनके,मन राधा अधीर|

हाथो में बासूँरी सजे, मधूर तान बजाये,
राधा होठं सुर सजे, सभी रमते जाये|

गोपियन का नेह बसे,मन से हारी हाय,
कान्हा के रुप पर,मोहित होती जाये|

पनघट पर रास रचे,बृज नंद किशोर,
राधा की प्रीत जगे, संग कृष्ण विभोर|

बृज के प्राण बसे, स्नेह-नेह अपार,
जशोदा के नंद लाला, महिमा अपरम पार|

अंजू निगम
इंदौर

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