सूर्य है महान
चला था आज वो सूरज से लेने पंगा,
ठान लिया आज कर रहेगा वो दंगा|
सूरज ने जो दिखलाये अपने तेवर,
दिन में ही नाच उठे आँखो के घेवर|
दूर ही रहे मुझसे ऐ इंसान नादान,
गर न बन सका तु मेरा कद्रदान|
उगता मैं तो करता दिन का आगाज
डुबता हूँ तो करूँ रात का निर्माण।
अंजू निगम
देहरादून
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें