वादा
वादा ऐसा करो जो निभा तो सको,
वफा ऐसी जो साथ चल तो सको|
पंरिदे तो उड़ चले आंसमा छुने को,
दर्द नीड़ का, कुछ जान तो सको|
फरेबी दूनिया में भीड़ बहुत दिखी,
ऐतबार थोड़ा मुझमें जता तो सको|
क्या खोया,क्या पा सका हूँ फकत,
हिसाब मेरा भी तुम लगा तो सको|
किस्मत क्यों रुठ गयी हैं अब मुझसे,
मेरे हिस्से की लौ तुम जला तो सको|
अदालत लगी थी खुदा के दर पर,
इंसाफ ही कुछ, तुम ही पा तो सको|
इश्क बेइंतहा रहा उनकी तरफ का,
वफा के गुंचे , जरा खिला तो सको|
अंजू निगम
देहरादून
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