दिल तो उनका
मेरा दिल अब न कभी उनका हो जायेगा,
गैर सी सीरत थी गैर ही तो हो जायेगा|
हर गली, हर कूचा बेगाना आज लगा,
ये शहर ही अब अंजाना सा हो जायेगा|
चाहत की बारिश में कितना भीगे थे हम,
वो भीगी सहर अब काली शब हो जायेगा|
नंगे पाँव दूर तलक साथ चले थे कदम,
अब महज अफसाना सा ही हो जायेगा|
सोंधी सी महक बसी थी तेरे आंचल की,
सब एक ख्वाहिशो का शोर हो जायेगा|
गैर था तो कैसे कह देती उसे अपना,
अपना समझे, तो खुद अपना हो जायेगा|
अंजू निगम
देहरादून
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