आज की चित्र आधारित रचना
सेदोका विधा
सूखी सी आँखे
जंग लगे से चेहरे
सलवटो से भरे|
प्रश्न तैरते
खो जाते फिजा में
बिधंते तश्तर से|
कोई आसरा
न सहारे किसी के
बेबसी बेइंतहा|
अंजू निगम
देहरादून
आज की चित्र आधारित रचना
सेदोका विधा
सूखी सी आँखे
जंग लगे से चेहरे
सलवटो से भरे|
प्रश्न तैरते
खो जाते फिजा में
बिधंते तश्तर से|
कोई आसरा
न सहारे किसी के
बेबसी बेइंतहा|
अंजू निगम
देहरादून
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