कब्र के फूल

कब्र के फूल

कब्र पर मत आना तुम मेरी, फूल चढ़ाने को,
आऊँगा लौट कर मैं रस्म ऐ इश्क निभाने को|

बहुत नफरते, तल्खियाँ रही हमेशा दरम्यान,
तुम चले आना एक और रंजिश निभा लेने को|

उसी के आने से मौसम लेने लगे हैं करवटे,
नजरो का इतना असर तो रखना सताने को|

ऐलान रोज रहता न गुजरुँगा गली से अब तेरे,
कमबख्त कदम बढ़ ही आते नजर मिलाने को|

बेखबर से दिखाते मगर जताते भी जाते है,
मुहोब्बत हैं तो रकीब न बन तू दिखाने को |

शाम को तो बहुत गिना शब हो जाने तलक,
अब एक सहर उगाओ फकत मन भरमाने को|

अंजू निगम
देहरादून

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top