मिलती कहाँ हैं
तस्वीर तकदीर की कभी बनती कहाँ है,
तदबीर ही ऐसी कोई मिलती कहाँ है|
पुँछु उनसे कि जिदंगी को अब ढुंढु कहाँ,
जिदंगी को अब जिदंगी मिलती कहाँ है|
अंजू निगम
देहरादून
मिलती कहाँ हैं
तस्वीर तकदीर की कभी बनती कहाँ है,
तदबीर ही ऐसी कोई मिलती कहाँ है|
पुँछु उनसे कि जिदंगी को अब ढुंढु कहाँ,
जिदंगी को अब जिदंगी मिलती कहाँ है|
अंजू निगम
देहरादून
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