मिलती कहाँ है

मिलती कहाँ हैं

तस्वीर तकदीर की कभी बनती कहाँ है,
तदबीर ही ऐसी कोई  मिलती कहाँ है|

पुँछु उनसे कि जिदंगी को अब ढुंढु कहाँ,
जिदंगी को अब जिदंगी  मिलती कहाँ है|

अंजू निगम
देहरादून

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top