दिनांक: ११/०६/२०१९
वार:मंगलवार
विषय:रेत के समंदर में सीप के मोती
विधा: मुक्तक

मुहोब्बत के मौम में गुंचे दिलो के खिले है,
नकाबो के दौर मे,चेहरे आईना से बने है|

रेत के समंदर में सीप से मोती जड़े है,
उम्र के गलीचे में यादो के धागे बुने है|

अंजू निगम
इंदौर

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