गजल(बेबहर)

चातक की चकोरी बन चाँदनी रहूँ,
ओस की बूँदो की प्यास बन पावनी रहूँ|

सुकून की तलाश में, दर खुदा की चाहूँ,
रहमतो की तेरी सी, बन बंदनी रहूँ|

शाम के कत्ल पर रात का जश्न मना,
इस खता के ऐवज में,बन कहानी रहूँ|

रुखसारो तलक अश्को की रियासत रही,
दर्द की सिलवटो में,बन पेशानी रहूँ|

बादलो के काँरवा में जो एक सावन ढूँढु,
भादो की दरिया बन दरम्यानी रहूँ|

"अंजू" फैसले तकदीर के,एक नजर ढूँढु,
तदवीर के चश्मे की  बन कमानी रहूँ|

अंजू निगम
इंदौर

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top