गजल
गुलाबी लिफाफे में बंद सी मुहोब्बत दीजिये,
इबादत कर सकुं,ऐसी एक इबारत दीजिये|
आँखो की हो पर्दे दारी इतनी शराफत रहे,
तौहीन भी कर न सके ऐसी अदावत दीजिये|
परवाज को पँख खोलने की इजाजत तो हो,
ख्वाहिशों को उड़ने सी हिफाजत दीजिये|
मौसम हो भी ले आशिकाना तो क्या,
संगदिल भी रह न सके ऐसी नफासत दीजिये|
"अंजू" एक हिना का रंग घुले जब हथेलियों पर,
इश्क का सुरुर चढ़े ऐसी नजाकत दीजिये|
अंजू निगम
इंदौर
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