राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर|
  पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू नहीं हुआ था| तभी राहुल ने देखा,उसका बेटा विभु मुख्य द्वार पर नीली-लाल पेंसिल से आढ़ी -तिरछी लकीरे खींच रहा हैं|उसे एकदम अपने पुराने किराये के घर की याद आ गयी|जहाँ की दीवारे विभु की ऐसी ही कलाकारी से पटी हुई थी|
  राहुल ने आगे बढ़ एक जोरदार झापड़ विभु के गाल पर जमाया|
   विभु के दादाजी ने आगे बढ़ सन्नाटे में खड़े विभु को अपने से चिपटाते हुये कहा,"काश! तेरी ये टोक पहले हो गयी होती तो आज तुझे अपने हाथो की  लकीरे अपने बेटे के गालो पर बनाने की जरूरत न पड़ती|
   अंजू निगम

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top