कुछ लफ्ज़ होते खामोशियों के तो अच्छा होता,
कुछ मजमे लगते तन्हाइयों के तो अच्छा होता|

कुछ फूल खिलते पतझड़ में तो अच्छा होता,
एक सावन ठहरता जेठ में तो अच्छा होता|

पर बंसती रंग  मेरे जीवन को रंगता तो अच्छा होता,
कुछ सलवटे पड़ती तेरे मेरे प्यार की तो अच्छा होता|
अंजू निगम
इंदौर

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