आयोजन-गजल
दिन-२३/११/२०१८
रदीफ-उनसे

पहली बार एक गजल बोयी हैं|

वो पहली सी मुलाकात नहीं उनसे,
कोई ताल्लुक, जज्बात नहीं उनसे|

दोस्ती,कोई याराना अंदाज नहीं उनसे,
पर दुश्मनो सी भी पहचान नहीं उनसे|

माना ये दर,ये राह अब नहीं उनसे,
पर ये शहर तो अंजान नहीं उनसे|

दुनिया की भीड़ में खो दिया खुद को,
अब कोई इल्तिजा, कोई फरियाद नहीं उनसे|

माना न कोई अकीदा,न बोसे-वफा के,
गैर होकर भी बैगानो से जज्बात नहीं उनसे|

   अंजू निगम
     इंदौर

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