भुख

   बुधिया बैठा सोच रहा हैं,"माई को का हुआ हैं?काहे एक बखत का रोटी अपने लिए नहीं थापती?"
  उधर बुधिया से दो साल बड़ा किसना सोच रहा हैं"माई का एक बखत का भुख हम खा गये|जब तक काम नहीं चलता,एक बखत का "भुख"हमे भी नहीं लगेगा|
                 ★अंजू निगम★
                     इंदौर

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