कई दिनो बाद सूजी ने मि.डिसुजा के चेहरे पर सूकुन देखा था|बदलाव मि.डिसुजा भी महसूस कर रहे थे|इस बार केविन ने भी स्थिती को नये रूप मे देखा था|
कुछ सोच ऐसी बनी कुछ परिस्थिति ऐसी तैयार होने लगी| सूजी उस दिन कुछ सोच कर सोयी|माँ के चले जाने के बाद आज उसे सुकून की नींद आयी थी|
सूजी के दो फ्लैट छोड़ जो फ्लैट था|उसके बाशिंदों ने कुछ दिनो पहले ही घर खाली किया था|वे अब ये फ्लैट बेच देने की फिराक में थे|बार-बार इंटिया आ कर फ्लैट की सार-सभांल करना भी सभंव नहीं था|न उन्हें कोई ईमानदार मिला जो उनका पैसा उनके अंकाउट तक पहुँचा सके|हमेशा वो कोई खर्च दिखा बड़ी रकम ऐठ लेता|
इससे पहले की सूजी के हाथ से वो फ्लैट निकल जाता|उसने मि.डिसुजा से उसे खरीद लेने की बात की|केविन को भी ये सुझाव अच्छा लगा|सूजी ने उसी दिन मकान मालिक से बात की|बात पैसो पर आ रूक गयी|
मि.डिसुजा बेटे के वापस चले आने की आस छोड़ चुके थे|उन्हें कुछ निणर्य ले था और जल्द लेना था|अतः उन्होंने एक कठोर निणर्य लिया|अपना पूराना फ्लैट बेचने का|पर एक बार निणर्य ले लेने के बाद उन्हें दिली सुकून मिला|शायद इतने दिनों के अकेलेपन ने उन्हें रास्ता दिखाया हो|
सब पक्का हो गया और सूजी के घर के पास ही उनका फ्लैट भी हो गया|जॉन को भी नाना का साथ मिल गया|दिन रात का|सूजी की हर 'वीकेंड'की भाग दौड़ भी बच गयी|
मि.डिसुजा के मन पर भारी होता कितना ही बोझ उतर गया|केविन की चुभती निगाहें अब उनका पीछा नहीं करती|
पूराने फ्लैट से जकड़ी यादो को अब मि.डिसुजा ने अपने से चिपका लिया हैं|और मैरी के सामान से|जिससे उन्हें मैरी के आसपास बने रहने का अहसास होता हैं|अपनी उम्र भी तमाम होने तक|
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