मि.डिसुजा का बेटी के यहाँ बन आना हो नहीं पाया|पर बेटी की ममता,उसे डैडी तक खींच लाती|सारा घर सुव्यवस्थित कर वो चली जाती|हंलाकि बेटी का यूँ दो पाटो में पीसना उन्हें तकलीफ देता|सप्ताह के अंत में परिवार समेत कही घुमने का उसका कार्य कम्र डैडी की घर गृहस्थी की भेंट चढ़ जाता|उसने कभी इस बात की शिकायत नहीं की|पर दामाद के मुँह से कुछ ऐसा निकल ही जाता कि वो कसमसा कर रह जाते और बिटिया को अगले सप्ताह न आने की सख्त हिदायत मिलती|
"बेटी अगले सप्ताह तु कही घुमने का प्रोग्राम बना कर निकल जाना|जॉन भी तो कहीं घुम आने को तरस ही जाता होगा|उसने भी नाना के घर के अलावा कोई दूसरी जगह देखी ही न होगी|"मि.डेविड कहने को तो कह जाते हैं पर वे भी जानते हैं और बिटिया भी कि नाती से मिलने की आस ही उनका सारा सप्ताह निकालती है|
मि.डेविड जानते हैं कि हर सप्ताह की ये व्यवस्था ज्यादा दिन चलेगी नहीं|बिटिया की गृहस्थी में दरार डालना तो वे नहीं चाहते|
यही सब सोच वे बेटी के साथ कही घुमने का प्रोग्राम भी बनाते हैं|पर दामाद की लगातार घुरती नजरे उनको असहज बना देती|तब उनको ऐसा लगता जैसे वे एक कठपुतली की मानिंद केवल उनके पीछे घिसटते जा रहे हैं|
ऐसे में उन्हें लगता मैं घर में ही भला था|अपने फ्लैट के आसपास उठती आवाजें,उनमें नितांत अकेले हो जाने का जब आभास करवाती तब वे और कुठिंत से होते जाते|तब अक्सर वे सामने बने पार्क की किसी खाली बेंच पर घंटो गुजार देते|
पार्क उन्हें जीवन का अहसास दिलाता|खाली फ्लैट में जाने में उन्हें घबराहट होती|बेहताशा थक जाने पर ही वे घर जाते|केवल सो जाने के लिये|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
नेहा ने तबादले से होने वाली टुटन को दिल से महसूस किया था| जब पैर जमने लगते और दोस्तो की ऱेहरिस्त लंबी होने लगती तब वहाँ से उखड़ किसी दूसरी ...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी सुधीजनों को शुभकामनाएं। इस अवसर पर अपने कुछ हाइकु पटल पर प्रेषित कर रही हूँ। हिंदी ही भाषा विश्व पटल पर मान बढ़ाये...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
जेवर "जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
लकीरे राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर| पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू न...
-
गुरु मंत्र मैं अपनी ही बहन का फोन "इग्नोर"करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय ...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें