जब पेरू सूर्य बन आकाश में चमकने लगा तभी बादल के कुछ टुकड़े आये और उन्होंने सुरज को ढ़क लिया|अब पेरू को लगा कि बादल ज्यादा शक्तिशाली हैं|उसने माँ काली की प्रार्थना की कि उसे बादल बना दे|बादल बन वो आकाश में विचरण करने लगा|तभी हवा का तेज झोंका आया और वो गेंद की तरह इधर उधर ढोलने लगा|उसने फिर माँ काली को याद किया|वे उसके बोले बिना समझ गयी और उसे हवा बना दिया|
पेरू हवा बन बहने लगा|तभी मार्गमें उसके विशालकाय पहाड़ आ गया|उसे देख पेरू को लगा कि सचमुच पहाड़ ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली हैं|अतः उसने माँ काली की फिर आराधना की|माँ ने उसे पहाड़ बना दिया|
अब पेरू पहाड़ की तरह तन कर खड़ा हो गया|लेकिन एक दिन उसे लगाकि कोई उस पर प्रहार कर रहा हैं\उसने नीचे देखा तो बिल्कुल उसी की तरह दिखने वाला एक आदमी पहाड़ पर प्रहार करता जा रहा था|
ये देख पेरू सोचने लगा,"मैं बेकार हीइस फेर में पड़ा|आज मुझे पता चला कि मैं बेकार ही दूसरो को अपने से ज्यादा शक्तिशाली समझ दुखी होता रहा|मेरा जीवन और काम दोनो ही बहुत अच्छे थे"
इस बार उसने दुखी मन से माँ काली को बुलाया और बोला,"माँ मुझे समझ आ गया|कि मैं जैसा भी था बहुत अच्छा था|आप मुझे एक बार फिर पेरू बना दे|अब मैं आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगा|"
ये सुन माँ काली बोली,"बेटा इस दूनिया मै अक्सर लोग तुम्हारी तरह गल्ती करते हैं|दूसरो के जीवन को देख सोचते हैं कि उनका जीवन हमसे बेहतर हैं|पर ऐसा नहीं होता|सघर्ष और मेहनत हर किसी के जीवन का पहला पाठ हैं|जो इस पाठ में पास हो जाता हैं वो जीवन की किसी भी परीक्षा को पास कर सकता हैं|और जीवन चैन से जीता हैं|"
इसके बाद माँ काली ने पेरू को फिर से पेरू बना दिया|इतने में उसकी आँख खुल गयी|उसने शीशे में अपने को देखा और पाया कि वो जैसा था अभी भी वैसा ही हैं|वो मुस्कुरा दिया|सपने में ही सही उसे जीवन की एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी थी|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
नेहा ने तबादले से होने वाली टुटन को दिल से महसूस किया था| जब पैर जमने लगते और दोस्तो की ऱेहरिस्त लंबी होने लगती तब वहाँ से उखड़ किसी दूसरी ...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी सुधीजनों को शुभकामनाएं। इस अवसर पर अपने कुछ हाइकु पटल पर प्रेषित कर रही हूँ। हिंदी ही भाषा विश्व पटल पर मान बढ़ाये...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
जेवर "जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
लकीरे राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर| पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू न...
-
गुरु मंत्र मैं अपनी ही बहन का फोन "इग्नोर"करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय ...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें