जिदंगी उसे मिलती रहे,
इसलिये रोज टुट-टुट कर जिया हूँ मैं|

जिदंगी उसे मिलती रहे,
उसके आँगन की छांव बन जिया हूँ मैं|
 
जिदंगी उसे मिलती रहे,
सूरज बन आकाश में चमका हूँ मैं|

जिदंगी उसे मिलती रहे,
उसके घर की नींव बन खड़ा हूँ मैं|

जिदंगी उसे मिलती रहे,
खेतो में बीज बन गड़ा हूँ मैं|

जिदंगी उसे मिलती रहे,
उसके हिस्से के आँसू भी बहाता हूँ मैं|

जिदंगी उसे मिलती रहे,
इसलिये अपनी जिदंगी को सलीब पर चढ़ाये खड़ा हूँ मैं|

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top