विभा ने तय किया कि अब से वो ये गल्ती नहीं करेगी| उसका अपना जीवन तो होम ही हो गया हैं|
स्कुल के अलावा अपने बचे वक्त का वो सदुपयोग करेगी| लेकिन क्या?अगर NGO में काम करना शुरु करती हैं तो उसे अपना काफी वक्त देना होगा| नौकरी के साथ NGO का काम उससे सध पायेगा या नहीं| इस बात का संशय था|
तब उसने यही सोचा कि क्यों न वो अपने उस हुनर को आगे बढ़ाये जो अब तक की व्यस्तता की वजह से बिसर गये थे|
स्कुल और कॉलेज के दिनो में उसने जाने कितने लेख लिखे थे जो खुब सराहे जाते थे| अब तो स्कुल के अलावा उसे याद नहीं आता कि उसने कभी कलम उठायी हो|
उसने तय किया कि वो अब कुछ लिखना शुरु करेगी| पर आज तो वो खुब थक गयी हैं| कल से ये शुभ काम शुरु होगा| और फिर अगले कई हफ्तो तक आज-कल ही होता रहा विभा का| कभी उसे कही जाना होता, या वो बहुत थकी होती या घर के कुछ और काम निकल आते|
एक दिन सुबह ही देव ने पेपर उसको दिखाते हुये कहा, " इस शहर में तो बहुत प्रतिभाँए भरी हुई हैं"| फिर देव ने पेपर उसके आगे कर दिया|
विभा ने देखा कि हर उम्र की कितनी ही लेखिकाये गौरवान्वित सी किसी पुरस्कार समारोह का हिस्सा बनी हैं| विभा की आँखे चमक उठी|
" मैं भी तो बन सकती हूँ इस वर्ग का हिस्सा" विभा का मन बैठा|
" पर मैडम उसके लिये कलम उठा कुछ लिखना पड़ेगा" विभा अपने आप से बोल उठी|
अगले महीने से गर्मियों की छुट्टियाँ शुरु हो जायेगी| तभी मैं कुछ लिखना शुरु करुँगी| पर इस बार उसका निश्चय दृढ़ था|
आज उसने अपने लिये एक और राह चुन ली थी|
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