ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन लंबा चला|सुचिता मन ही मन प्रार्थना कर रही थी कि ऑपरेशन सफल हो|
अंकल का सहारा उसे बहुत संबल दे रहा था|उसने अंकल का फोन नंबर लिया| उन्हीं से चला कि आंटी उन्हें छोड़ इहलोक जा चुकी हैं| बच्चो को उनकी परवाह नहीं|
"आज से हमें ही अपना बच्चा मान लीजिये आप|" सुचिता का ये कहना अंकल को आत्मविभोर कर गये|और उन्होनें सुचिता के सर पर हाथ रख उसे आर्शीवाद दिया|
अंकित का ऑपरेशन सफल रहा| शाम तक उसे होश भी आ गया| उसी ने सुचिता को ऑफिस के एक दोस्त का फोन नबंर दे उसे सारी स्थिती से अवगत करा देने को कहा| अंकल को सुचिता ने घर भेज दिया था|
अंकित ने ही बताया कि उसका मोबॉइल उस एंक्सीटेड के समय ही कही गिर गया था| इसलिये वो उससे संपर्क न कर पाया|
सुचिता ने फोन पर अंकित के दोस्त को सारा हाल बताया| कुछ ही देर में सारा ऑफिस स्टाफ अंकित के इर्द-गिर्द था| फिर सुचिता को कुछ सोचने की जरुरत ही न पड़ी| अंकित के दोस्तो ने सारी जिम्मेदारी संभाल ली|
अगले दिन सुचिता कुछ काम से अंकित के कमरे से निकली तो उसे अपनी आँखो पर विश्वास न हुआ| सामने माँ- पापा खड़े थे|
सुचिता सारे गिले-शिकवे भुल माँ-पापा के गले लग गयी|आखिर गल्ती तो उससे ही हुई थी|
" कितना फोन किया तुझे?परेशान हो गये थे एकदम| तेरा मोबॉइल तो तबसे switch off ही बता रहा हैं| फिर अंकित के ऑफिस फोन किया | तब सारा हाल पता चला|" माँ एक सांस में ही सब कह गयी|
" मेरा मोबॉइल तो खराब पड़ा हैं| आपको फोन कर तुरंत ही तो मैं यहाँ आ गयी थी|" सुचिता बोली|
" पापा मुझे माफ कर दीजिये|" सुचिता हाथ जोड़ पापा के सामने खड़ी थी|
" तुझे माफ करना कठिन था| पर शायद हर बुरी परिस्थिती कुछ अच्छी बाते भी साथ लाती हैं| खैर, ये समय नहीं इन सब बातो को करने का| अदंर चलते हैं दामादजी के पास"|
पापा के मुँह से दामाद शब्द सुन कर ही सुचिता ने समझ लिया कि पापा ने उन्हें दिल से माफ कर दिया हैं|
सब अंकित के कमरे की ओर बढ़ गये| उधर सुचिता यही सोच रही थी कि पिछले कुछ दिनो से जो उसकी इतनी कठिन परीक्षा चल रही थी आज उसे उसी का प्रतिफल मिला हैं|
इति
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