मोबॉइल उसका ठीक था नहीं कि गुगल सर्च या नेवीगेटर जैसे ऐप्स डाल वो अंकित के ऑफ्स पहुँच पाती|
उसका खुब रो लेने का मन हुआ| कुछ तय कर लेने की स्थिती में वो थी नहीं| फिलहाल रात गुजरने के इंतजार के अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था| उसकी जान हलक में आ अटकी| पहले कभी ऐसे हालातो का उसने सामना नहीं किया था| हजार मनौतियाँ मान ली उसने|
उसने फोन उठाया| फोन में अभी भी कड़कड़ाहट थी| पर इतना शोर नहीं कि बात न समझ आ सके| बाहर बारिश भी रुक चुकी थी| उसने अकिंत को फोन मिलाया और पूरी घंटी जाने तक इंतजार किया| फोन नहीं उठाया गया| तो उसने दुबारा नंबर डॉयल किया| पर नतीजा वही सिफर| उसका मन बुरी आशंकाओ से घिर गया|
उसने घड़ी देखी| अब ऑफिस फोन करना बेकार था| इतनी देर तक वहाँ मिलता कौन? नीचे चौकीदार के केबिन का नंबर उसके पास था नहीं|
उसने फिर एक बार अपने को कोसा," कितने से लिया हैं उसने हर चीज को|"
मन ही मन अपने से वायदे किये
कि" बस एक बार अंकित घर आ जाये फिर में सारे नंबर एक डायरी में उतार लूंगी|आस-पास के लोगो से बातचीत का सिलसिला शुरु करुँगी| माँ चाहे जितना गुस्सा हो पर उनके पास जरुर एक बार हो कर आऊँगी|मैं खुब अच्छी बन रहूँगी| अंकित को भी शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी|"
पकौड़ी का घोल वैसा ही पड़ा रहा| चाय बना पी लेने का भी उसे मन नहीं हुआ| चाय की उसे ऐसी तलब लगी थी कि आज चाय न होने से उसका सिर दुखने लगा|दिल में हौल उठ रही थी| ऐसे में चाय उसके हलक के नीचे कैसे उतरती?
अंकित को एक बार फिर फोन करना बेकार गया| आखिर अंकित फोन क्यों नहीं उठा रहा| मन बुरे ख्यालो से भरता जा रहा था| दो बोल तसल्ली के देने वाला भी तो कोई नहीं था|
कुछ न समझ आने पर आखिर उसने माँ को फोन मिला दिया|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी ...
-
नभ में पौ फटी और सूरज ने अपनी लालिमा बिखेर दी| सूमि को रात देर से नींद आयी थी|चाची की आवाज से वो चौंक कर उठ बैठी| वक्त देखा और जल्दी अपनी च...
-
रंग ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली बहू ...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
रिश्ते दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|"जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो ज...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें