रात को दुकानदार ने लड़के को अपने घर ही टिकाया| लड़का नानुकुर करने की स्थिती में नहीं था| किसी तरह खाना खा सुला दिया|
नींद ले लेने से दूसरे दिन वो थोड़ा संभला हुआ लगा| बहुत प्यार से उसने लड़के को अपने विश्वास में लिया| लड़का भी शायद अपना मन खोल लेना चाहता था| थोड़ी सी मशक्कत के बाद उसने जो बताया| वो यकीन से परे और भयावह था|
दुकानदार को जरा गुमान न था कि कल हुये बम ब्लास्ट के तार इस लड़के से जुड़े होगे| लड़का जिसने अपना नाम शेखु बताया था, लगातार ये रट रहा था, " ये बात किसी को न बताईयेगा नहीं तो वे लोग मेरे परिवार को खत्म कर देगे"!!
शेखु ने जो कहानी बंया कि उसके मुताबिक," उसकी गरीबी ही उसे इस आंतकवादी गिरोह तक घसीट लायी| शुरु में उससे छोटे-छोटे पार्सल पहुँचवाये गये| धीरे-धीरे वो गिरोहकी गतिविधियों में इस कदर उलझ गया कि बाहर आने के सारे रास्ते बंद हो गये|
कुछ पैसो के लिये और कुछ घरवालो को महफुज रखने की खातिर ही वो ये काम करने को तैयार हो गया|इस बात से अंजान की उस पार्सल में था क्या!!!!
दुकीनदार ने सब बाते ध्यान से सुनी| फिर उसके घरवालो को बुला सारी बातो का खुलासा किया| दुकानदार ने पुलिस को सारी बाते तफसील से बता देने को भी कहा| पर शेखु और उसका परिवार पुलिस तक जाने को तैयार न हुये|
दुकानदार उन सबको बाहर ले कर आया," इस तरह कितनी लाशो से अपने हाथ रंगोगे| इन निर्दोष लोगो का क्या कसुर था| प्रायश्चित करना चाहते हो तो पुलिस को सब सच बता दो| सब ठीक हो जायेगा|"
मामला संगीन था| इसलिये पुलिस के आला अधिकारी तुरंत आ पहुँचे| उन्होने शेखु की बात ध्यान से सुनी| उन्हें लड़का मासुम लगा|
" बेटा तुम हमें वो जगह दिखा सकते हो जहाँ तुम्हें ले जाया जाता था?" पुलिस के बड़े अधिकारी ने नम्र स्वर में कहा| शेखु ऐसा कर लेने को तुरंत तैयार हो गया|
पुलिस ने उस जगह दबिश डाल कई आंतकवादियों को धर दबोचा जो वहाँ से पलायन की तैयारी में थे| इस दबिश में इस ब्लास्ट का मास्टरमांइड भी पकड़ा गया, जो एक बड़ी सफलता थी|
इस सहयोग के लिये पुलिस ने शेखु की सजा काफी कम कर दी| उसकी उम्र को देखते हुये उसे एक साल के लिये रिमांड होम भेज दिया गया| उसके परिवार को एक गुप्त जगह पर|
बाद में उस दुकानदार ने ही उसे पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली| जिसमें पुलिस की ओर से भी आर्थिक सहायता मिली|
इस तरह एक मासुम आंतक की राह में जाने से बच गया|
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