नीरु के मम्मी-पापा ने सबका स्वागत किया|
" तैयारी कैसी चल रही हैं नीरु बेटा" जब अंजली के पापा ने ये कहा ते नीरु को बहुत सुकून मिला| और कुछ पुछ लेने का सुअवसर भी|
" अगर किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो पुछ लो| मैं आया भी इसी लिये था|" जब अंकल के मुँह से ये सुना तो नीरु को मानो मुँह माँगी मुराद मिल गयी|
" नहीं अंकल,वैसे तो अपनी तरफ से पुरी तरह से कोशिश की हैं| पर कुछ "difficult points" हैं वो हो जाते तो इत्मीनान रहता" नीरु बिना अंजली के मम्मी की ओर देखे ये कह गयी|
" लाओ बेटा मैं तुम्हें समझा दूँ और कुछ जरुरी टिप्स भी दे दूँ| तब तक बाकी लोग गप्पे मारे" अंकल ने हसंते हुये हल्के लहजे में कहा|
अंजली के पापा, विकास ने जैसे ही नीरु को बैठ पढ़ाना शुरु किया| अंजली की मम्मी, सविता तुरंत बोल उठी," अरे!! अब आखिरी समय ये सब समझा आप उसे और कन्फुयज कर देगे"|
"कोई कन्फुयजन नहीं होगा बल्कि इन टिप्स से पेपर हल कर लेने में मदद ही मिलेगी|" विकास बोले|
ये सुन सविता बैचेन हो गयी| नीरु के मम्मी-पापा से कुछ यहाँ -वहाँ की बात कर एकदम खड़ी हो गयी," चलिये, घर चलते हैं| कल अंजली का पेपर हैं| जल्दी सोयेगी तभी जल्दी जागेगी"|
" २०-२५ मिनट में कुछ नहीं होता| थोड़ी देर बात करो| कुछ जरुरी टिप्स देकर चलते हैं|" विकास हंस कर बोले|
सविता को विकास पर बेतरह खीज आ गयी| उसका अपना दांव उल्टा पड़ गया था| कहाँ तो वो आयी थी कि जा नीरु का मन पढ़ाई से थोड़ा भटका दे| कहाँ ये जनाब उसे जरुरी टिप्स दिये दे रहे हैं|
बात बनती न देख सविता जिद पर उतर आयी," रात काफी हो चुकी हैं|अब चलना ही चाहिये|"
सविता की इस हरकत पर विकास के साथ अंजली भी शर्मिंदा हो उठी|
" वैसे भी पिछले दो बार से नीरु के नंबर अंजली से ज्यादा आये हैं| कभी तो मेरी बेटी उससे आगे निकले| वैसे भी नीरु जहीन लड़की हैं| वो तो पेपर निकाल ही लेगी|" सविता को अहसास ही नहीं हुआ कि ये कह उसने न केवलअपनी बेटी को आहत किया बल्कि उसका अपना स्वार्थ भी उजागर हो गया|
सविता की इस हरकत से वातावरण बोझिल हो उठा| नीरु को कुछ जरुरी टिप्स दे विकास उठ खडये हुये| उनका चेहरा शर्मिदंगी से भर उठा|सविता के इस व्यहवार से नीरु के मम्मी-पापा हतप्रभ थे| उन्हें यकीन न हुआ कि सविता की सोच इतनी कलुषित हो सकती हैं|
सविता के स्वार्थ ने दोनो परिवारो के बरसो के संबंध को खटाई में डाल दिया|अंजली और विकास को जो शर्मिंदगी उठानी पड़ी सो अलग|
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