अंजली और नीरु पक्की दोस्त हैं| दोनो का परिवार एक दूसरे को बरसो से जानता हैं| दोनो के शौक भी एक और पढ़ाई के विषय भी एक|
दोनो ने १२वीं के बाद बी़कॉम में एडमिशन लिया हैं| साथ ही सी.ए की परीक्षा की भी तैयारी कर रही हैं|कल दोनो का सी.ए का पहला पेपर हैं| बी़कॉम की पढ़ाई करते सी.ए का पेपर भी निकालना एक कठिन चुनौती हैं|पर दोनो अब पीछे नहीं हट सकती|
पेपर निकालने के लिये मेहनत के साथ अच्छी गाइड लाइन्स की भी जरुरत होती हैं| इस मामले में अंजली खुशनसीब रही| उसके पापा खुद भी एक सी.ए हैं|नीरु यही आ मात खा जाती हैं| उसके पिता सरकारी नौकरी में हैं और अच्छी कोचिंग और जरुरत की सारी बुक्स मौहया करा देते हैं| उसके आगे वे भी बेबस हैं|
अंजली ने कई बार नीरु को कहा कि तुम्हें जब भी कोई दिक्कत आये,पापा से पुछ लिया करो पर नीरु को अंजली की मम्मी शिखा का टोका टाकी रोक लेती हैं| शायद उन्हें अहसास हैं कि नीरु का दिमाग उनकी बेटी से ज्यादा तेज हैं|
आज नीरु बैठी अपने पेपर की अंतिम तैयारी कर रही थी| इतने में दरवाजे की घंटी ने उसे चौंका दिया| दीवार घड़ी रात के आठ बजा रही थी|इतनी रात गये कौन हो सकता हैं? जान पहचान के तकरीबन सभी लोग इस बात से वाकिफ हैं कि कल नीरु का पेपर हैं और वे उसके घर आना फिलहाल टाल रहे थे|
चुंकि नीरु के मम्मी -पापा का व्यहवार बहुत अच्छा था इसलिये अक्सर उनके घर परिवारो का आना-जाना रहता| पर नीरु के इम्तिहान के समय ये सिलसिला थोड़े दिनो के लिये थम जाता|
दरवाजा खोलने पर सामने अंजली और उसके मम्मी-पापा खड़े थे| नीरु और उसके मम्मी-पापा चौंक गये| क्या कल अंजली का पेपर नहीं?
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