७० बरस की हो चली थी सुमित्रा|चेहरे पर अभी भी वही तेजी बरसती थी|पर वक्त के थपेड़ो ने झुर्रियों का मायाजाल फैला रखा था|दाँत उनके अभी भी वैसे ही बने थे| हाँ, बालो की खेती उजड़ने लगी थी|मोटी चोटी की जगह पतली " चुटियाँ" ने ले ली थी| कई बार सोचा की बालो को कतर-ब्योत दे पर पुराने सस्कांरो से जकड़ी, बालो में कैंची नहीं फिरानी, वो हर बार मन मार लेती|
उम्रइतनी पा ली थी कि अब उनकी जरुरते गिनती की रह गयी थी|शरीर जरुर बुढ़ाया था पर जबान में अभी भी वही चटोरापन बाकी था| अपनी सेहत के चलते मन मार लेती|जानती थी तबीयत खराब होने पर कोई एक ग्लास पानी देने वाला न होगा|
यूँ तो उनका भरा-पुरा परिवार था पर सब अपने में रमे थे|
बच्चे भी " मुये" मोबॉइल से
सिर उठा कर देख ही न पाते|अपनी माँ की आवाज में भी" अभी आते हैं" कह आधा घटां निकाल देते| फिर उनकी कौन पुछ करता?
अपने पति के गुजर जाने के बाद वो यही बनआयी थी|अकेले उनका जी न रमता|दूसरे गाहे- बगाहे बीमारी घेर लेती तब अपने ही याद आते|
यही सब सोच तो वो यहाँ आ गयी थी| नहीं तो जीते जी अपनी ड्योढ़ी कौन छोड़ता हैं!!!
शुरु में तो बच्चे दादी की गुहार लगाते न थकते| उनके आस-पास बने रहते|तब उनको लगता कि बेवजह ही वो इतने सालो से बच्चो से दूर बनी रही| बेटा भी माँ की हर जरुरत को पुरा करने के लिये तत्पर रहता जैसे| सुमित्रा तो निहाल हो जाती|पर जैसे समय बीतता गया "दादी"का आर्कषण कम होने लगा| और वे भी घर में रखे फर्नीचर की तरह घर का हिस्सा बस रह गयी|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
नेहा ने तबादले से होने वाली टुटन को दिल से महसूस किया था| जब पैर जमने लगते और दोस्तो की ऱेहरिस्त लंबी होने लगती तब वहाँ से उखड़ किसी दूसरी ...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी सुधीजनों को शुभकामनाएं। इस अवसर पर अपने कुछ हाइकु पटल पर प्रेषित कर रही हूँ। हिंदी ही भाषा विश्व पटल पर मान बढ़ाये...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
जेवर "जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
लकीरे राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर| पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू न...
-
गुरु मंत्र मैं अपनी ही बहन का फोन "इग्नोर"करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय ...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें