प्रिय पाठको,
आज मैंने इस दुखद विषय को उठाया हैं| पर ये भी जीवन की सचाई हैं| मैंने इसमें एक सकारात्मक पहलु देखा हैं| उम्मीद हैं आपके मन को भी छुए|
आज मैं देश के एक प्रतिष्ठित कैंसर अस्पताल के आगे खड़ा हूँ| मरीज के तौर पर नहीं , एक स्वंयसेवक के तौर पर|
अरसा पहले इस अस्पताल से मेरा गहरा नाता रहा| यहाँ मैंने अपने पापा को कैंसर की आखिरी स्टेज में जिदंगी और मौत से लड़ते देखा|
अस्पताल में केवल पापा को ही नहीं जाने कितने लोगो को मैंने इस दुसाघ्य बीमारी से लड़ते और मरते देखा|मरीज के साथ आये लोगो पर दोहरी मार पड.ते देखा| अपनो को खो देने का खौफ और पैसो का पानी की तरह बहते जाना| नतीजा क्या होना होता था ये सभी को पता था|
वो समय बहुत कठिन था| जहाँ अपने साथ छोड़ते जा रहे थे तो परायो का क्या कहते| टुटन बहुत थी|
सब एक दूसरे का ही सहारा बने थे|
कहते हैं न जब गहन अंधकार हो वहाँ कही न कही से रोशनी की किरण फुट ही आती हैं|
ऐसे कठिन और तोड़ देने वाले दौर में हमारे डा. ही हमारे लिये देवदूत बन कर खड़े हुए|
उनके आत्मविश्वास और स्नेह से भरे शब्द बीमारी का कितना ही दर्द अपने में सोख लेते|
हमारी माली हालत उनसे छुपी न थी| जी तोड़ कोशिश के बाद जो पैसे जुटे थे वो सब रेत की तरह रिसते जा रहे थे| अपनी हालत पर मेरा कोई बस न रह गया था सो मैंने सब भगवान पर छोड़ दिया था|पापा की इस बीमारी ने मुझे पूरी तरह कंगाल कर दिया था| पैसो से भी और मन से भी|
पापा को तबांकु खाने की आदत थी| इस शौक ने उन्हें मौत के मुँह पर ला खड़ा किया था| उन्हें मुँह का कैंसर हो गया था|
उन्हीं के अनुसार," दर्द कभी-कभी असहनीय हो जाता था| ऐसा लगता था मानो मेरा मुँह अंदर से गल रहा हो| मुझे यकीन हो गया था कि मेरा अंत करीब हैं|"
ऐसी तोड़ देने वाली परिस्थिती में डा. हमारा संबल बन कर आये| रोज सुबह डा. की आत्मविश्वास से भरी बाते मुझमें और पापा में जीते रहने और परिस्थिती का डट कर मुकाबला करने का नया हौसला देती|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी ...
-
नभ में पौ फटी और सूरज ने अपनी लालिमा बिखेर दी| सूमि को रात देर से नींद आयी थी|चाची की आवाज से वो चौंक कर उठ बैठी| वक्त देखा और जल्दी अपनी च...
-
रंग ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली बहू ...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
रिश्ते दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|"जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो ज...
Nice story
जवाब देंहटाएं