सुमि अजीब पेशोपश में पड़ गयी|उसी समय उसने रिया को फोन लगाया| पता चला वो और मधु दोनो जायेगी|रिया अभी सुमि को फोन ही मिलाने जा रही थी|
रिया ने ही बताया कि ज्यादा दूर न जाने की बात ही हुई हैं| शाम तक वापस आ जायेगे|
चाची से कह देना ही उसे भीतर तक डरा रहा था| अभी दो हफ्ते पहले ही तो पल्लव के यहाँ पार्टी में गयी थी| और अब ये? चाचा को बता तो देगी मगर उनसे बता देने से भी बात नहीं बनती| सो, सुमि ने अपनी बहनो को ही पकड़ा| उनकी बात टालना चाची के लिये मुमकिन न होता| सुमि को इजाजत तो मिल गयी ये बात दीगर हैं कि चाची की घुरती नजरे उसने कितनी ही देर तक अपने ऊपर महसूस की|
चाची को शायद अपनी सोने की चिड़िया उड़ती दिखायी दी होगी|
दूसरे दिन " हाँ" में उत्तर पा पल्लव खुश हो गया| रिया- मधु के साथ सब अपने पुराने स्कुल इकट्ठा हुए| पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद सुमि की कभी इच्छा ही नहीं हुई| कि स्कुल हो आती| स्कुल दाने पर जाने कितनी यादे साथ-साथ हो लेती उसके| पर आज दोस्तो के साथ स्कुल जाने का मजा ही कुछ और था|
कुछ देर स्कुल में बीता सब लंबी ड्राइव के लिये निकल पड़े| माँ- बाप के चले जाने के बाद से सुमि कभी इस तरह किसी सफर में न निकली| उसके लिये तो ये सब एक सपना ही था|
पल्लव ही उनकी कार ड्राइव कर रहा था| पहले जब उसने एक-एक कर उनकी शैतानियाँ गिनानी शुरु की तो सुमि सहम गयी| क्या महज इसलिये पल्लव उन्हें यहाँ घुमाने लाया हैं? पर ये बाते तो वो कभी भी कह सकता था|यहाँ आ सुनाने का क्या मतलब? रिया ने ही उसे टोका| तब पल्लव हंस पड़ा" मैं तो पुराने दिनो को याद कर रहा था|"
"पुराने दिनो की और भी बाते हैं| उन्हें याद करे|" रिया बोल उठी|
" सुमि क्या सचमुच ऐसी कोई पुरानी यादे हैं|" पल्लव सुमि को देख बोला|
उसके बातो का मतलब समझ सुमि का चेहरा लाल हो गया| पीछे बैठी दोनो शैतान "ओssss " करके चिल्ला उठी|
" मुझे याद नहीं" सुमि धीमे से बोली|
" मुझे तो सब याद हैं|" पल्लव चिढ़ाने के अंदाज में बोला|
" हम कोई दुसरी बात करे क्या"? सुमि असहज महसूस करने लगी|
" मेरी सारी यादे तो उन्ही यादो के ईद-गिर्द टिकी हैं दोस्तो" पल्लव मुस्कुरा रहा था|
" हाँ, क्यों नहीं| प्यार तो होना ही था" मधु अपनी शैतानियों पर उतर आयी थी|
"तुम लोग बस करो नहीं तो मैं यही उतर रही हूँ" सुमि बोल उठी|" हाँ, तुम यहाँ उतर कर बैठो हम अभी घुम कर आते हैं" पल्लव बोला|
पीछे दोनो का समवेत ठहाका गुंज उठा|
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