सुमि का रिया पर इतना गुस्सा रहा कि अगले एक हफ्ते उसने रिया से कोई संपर्क ही नहीं किया| रिया फोन कर थक गयी| आखिर उसे बुटीक आना ही पड़ा|
" इतना गुस्सा लाडो!!!!" रिया बोली|
" तुम मेरी दोस्त हो उसकी तरफदारी कर रही हो|" सुमि की आँखे डबडबा आयी|
" ओहो!!! मुझे बिल्कुल पता नहीं था| कि तुम इस कदर sensitive हो|" रिया अचकचा कर बोली|
" जीवन में इतने अजीजो को खोया हैं कि अब मन डर गया हैं और किसी को खो देने से" सुमि ने आँखे नीची कर कहा|
" आज तुझसे कहा वरना् ये बाते किसी से न कही" सुमि ने जब कहा तो रिया ने उसे गले लगा लिया|
" मैं हूँ न लाडो तेरे लिये| हमेशा तेरे आस-पास ही बनी रहूँगी|" रिया की आँखे भी नम थी|
बिन माँ- बाप की बच्ची पर रिया का स्नेह उभर आया|
" सदा रहना" किसी का इतना स्नेह पा सुमि काबु न रख पायी और फफक कर रो पड़ी|
थोड़ी देर बाद रिया ने झटपट अपने आँसु पोछे|" जल्दी से चाय पिला लाडो| एक हफ्ते की सारी कसर निकालती हूँ आज" कह रिया हंस दी|
कुछ दिनो के बाद ही सुबह ही पल्लव का फोन आया|
" मैडम का गुस्सा कुछ कम हुआ हो तो कुछ काम की बात की जाये" पल्लव की आवाज में आज कोमलता थी|
" गुस्सा नहीं हैं मुझे" सुमि ने हल्केपन से कहा|
" उस दिन तो लगा नहीं ऐसा" पल्लव फिर चिढ़ाने के मुड में था|
" काम क्या हैं?" सुमि ने मुद्दे पर आते हुए कहा|
" चार दिन बाद लंदन वापस जाना हैं| सोचा सारे दोस्स मिल कर outing पर चलते हैं" पल्लव ने कहा|
सुन सुमि की चेहरा उतर गया| एक तो पल्लव की लंदन वापसी और दूजे चाची उसके बाहर जाने पर हजार बंदिशे लगायेगी|
सुमि थोड़ी देर चुप रही|
" हैलोsssss! उस तरफ कोई हैं क्या?" पल्लव चुहल करते बोला| सुमि के मन की भाव पकड़ लिया था उसने जैसे|
" हाँ मैं हूँ| मैं घर में पुछ कर बताऊँगी" सुमि की आवाज में बेबसी थी|
" तो मैडम अभी बड़ी नहीं हुई हैं" पल्लव उसी स्वर में बोला|
"मैंने कहा न! पुछ कर बताती हूँ" सुमि झुझंला उठी| बिना सोचे- समझे हाँ कह दूं बस | पल्लव को क्या पता कि कही जाने के नाम पर चाची कितना कोहराम करती हैं|
" ठीक हैं| कल सवेरे फोन करता हूँ| जवाब हाँ में आना चाहिये|" पल्लव ने सधिकार कहा|
सुमि को सुन अच्छा लगा|
क्या उसकी पनौती होने का असर कुछ कम हुआ था|
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