" क्यों री लाडो आज तो बहुत खिल रही हैं" भाभी ने चुहल की|
" भाभी मैं अब वो आपकी नाजूक सी श्रेया नहीं हूँ अब मैं कुछ बन कर ही दिखाऊँगी" श्रेया आत्मविश्वास से लबरेज थी|
" अच्छा लगा तुझे देख कर| तु इसी तरह तरक्की के पायदान पर चढ़ मेरी लाडो" भाभी का स्वर स्नेह से भीग उठा|
श्रेया अचानक आ भाभी से लिपट गयी| इतने देर का रुका बांध आसूँओ के रास्ते बह निकला| श्रेया ने सारी बात का खुलासा कर दिया भाभी से|
भाभी ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा| " तु जो करेगी अच्छा ही करेगी|"
" ऐसी प्यारी भाभी मुझे कहाँ मिलेगी|मैं तो वैसे ही आप पर निहाल हूँ| आप के होते मुझे बराबर अहसास रहता हैं कि कोई हैं मेरा सारा दर्द सोंक लेने को| बिना अहसान जताये|" श्रेया हसंती हूई बोली|
" भाभी से चुहल करती हैं लाडो," भाभी के स्वर में लगाव था|
" नहीं भाभी, सच ही कहती हूँ" श्रेया भाभी के गले लग कर बोली|
उस दिन के बाद से अभिनव की कोई बात न हूई घर में| शायद भाभी ने माँ को वहाँ रिश्ता कर लेने से रोक लिया था| श्रेया को राहत मिली| माँ के चुभते सवालो के जवाब अभी तो नहीं दे पायेगी|
श्रेया ने अब आगे पढ़ कुछ बन जाने का सोचा| यहाँ रह उसकी पढ़ाई नहीं हो सकती थी| रात-दिन अभिनव से सामना होता| जिससे अब वो बचना चाह रही थी|
श्रेया ने मुबंई जा अपने आगे की पढ़ाई जारी रख लेने का मन बना लिया| उस दिन के बाद से दोनो परिवारो के बीच एक अनदेखी दीवार खींच गयी|
समय अपनी गति से बहता रहा| अभिनव के साथ बुने वो सारे सपनो पर समय की धुल चढ़ती चली गयी| और सब कुछ धुमिल पढ़ता गया| बस जिंदा था तो वो तिरस्कार|
तब की निकली श्रेया ने आज ६ साल बाद अपने शहर की ओर कदम बढ़ाये थे|घर के लोग ही श्रेया से मिल आते थे|
इन छः सालो ने अपनी छाप छोड़ी थी| कितना कुछ बदल गया था| शहर भी और लोग भी| अभिनव का परिवार कहीं और जा बसा था| किराये के घर में बसर भी कितने दिन होती?
श्रेया में भी तो कितना बदलाव आ गया था| तेल लगे बालो की दो कसी चोटियों की जगह शैंपु किये करीने से कटे खुले बाल आ गये थे| उठने- बैठने का अदांज, बात करने का लहजा सब तो बदल गया था|
श्रेया के मन का एक कोना फिर से जीविंत हो उठा मानो यहाँ आ कर| facebook के जरिये उसने अभिनव को खोज निकाला| उसका ' स्टेटस' मैरिड देख श्रेया का मन चिहुंक उठा| अपनी एक common friend के जरिये उसने अभिनव का घर खोज निकाला|
अभिनव का चेहरा आज भी वैसा ही मोहित करने वाला था| उसके frdshiplist को देख जाने कितने चेहरे याद आते गये| श्रेया वापस जाने से पहले अभिनव से मिल लेना चाहती थी|
दो दिन बाद ही तो रविवार था| उसी दिन उसने अभिनव के घर हो आने का मन पक्का कर लिया| कोई लड़ाई थोड़े थी| वे दोस्त तो अभी भी थे|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी ...
-
नभ में पौ फटी और सूरज ने अपनी लालिमा बिखेर दी| सूमि को रात देर से नींद आयी थी|चाची की आवाज से वो चौंक कर उठ बैठी| वक्त देखा और जल्दी अपनी च...
-
रंग ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली बहू ...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
रिश्ते दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|"जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो ज...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें