रुपा जब सर झुका अंदर हो ली तब श्रेया ने नजर भर अभिनव को देखा| एक कमजोर नारी पर अधिकार जता वो अपने अंह में तना बैठा था| श्रेया को अभिनव की सोच पर हंसी भी आई और रुपा पर बहुत दया भी|
दोनो पति-पत्नी के बीच बराबरी वाली कोई बात न थी| रिश्ता शोषण और शोषित के बीच सिमटा था|
जब रुपा चाय लेकर आयी तो श्रेया ने अभिनव को सुना देने की गरज से ही कहा,"रुपा तुझे मालूम हैं अभिनव के सारे नोट्स मैं ही तैयार करती थी| आज जो जनाब M.A की डिग्री लिये बैठे हैं वो मेरी ही वजह से" ऐसा कह श्रेया ठहाका लगा हंस दी| पर इस हंसी में अभिनव का साथ नहीं मिला उसे| हाँ रुपा के चहेरे पर ऐसी मुस्कान थी कि चलो कोई तो हैं जो इनको इनकी जगह याद दिला सके| अभिनव कुढ़ कर रह गया|
जब श्रेया जाने को उठी तब मानो अभिनव ने चैन की सांस ली| वो फटाफट दरवाजा खोल बाहर निकल गया मानो अभी जेल से छुटा हो| और खुली हवा में सांस ले रहा हो|
अभिनव आगे निकल गया था तब रुपा ने श्रेया से कहा," दीदी मुझे मालुम हैं कि इनके साथ आपकी शादी होने वाली थी| आप जैसी जहीन से हो जाती तो अच्छा रहता न!! मैं कम पढ़ी-लिखी कहीं से भी इनके लायक नहीं|
रुपा के चहेरे की बेचारगी श्रेया को अंदर तक पिघला गयी|" मैं भी कभी इतनी ही बेचारी हुआ करती थी| पर आज मैंने अपने को इतना सळम बना लिया हैं कि कम से कम किसी की गलत बातो के आगे न झुकु| पढ़- लिख तुम भी सकती हो| घर बैठे ही| पर पहले अपने अंदर तो इच्छाशक्ति जगाओ|
अपनी मदद तुम्हें खुद करनी होगी| रास्ता दिखाने वाले तो कई मिल जायेगे|"
रुपा ने मानो आत्मसात कर लिया हो इन बातो को| उसके चहेरा आत्मविश्नवास से चमक उठा| वैसा ही जैसा उस दिन श्रेया के चहेरे पर उभरी थी आत्मविश्वास की किरण|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी ...
-
नभ में पौ फटी और सूरज ने अपनी लालिमा बिखेर दी| सूमि को रात देर से नींद आयी थी|चाची की आवाज से वो चौंक कर उठ बैठी| वक्त देखा और जल्दी अपनी च...
-
रंग ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली बहू ...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
रिश्ते दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|"जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो ज...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें