अवनी के चेहरे पर खिलती मुस्कान सुयश अपने लिये अच्छा शगुन मान बैठा| पर फिर अगले कुछ दिनो तक कोई शगुन न निकला| सुयश बैचेन हो उठा| पहले पायदान में ही सीढ़ी खत्म होती लगी|
महीनो बाद वक्त ने कुछ ऐसी करवट बदली कि अवनी की कंपनी में सुयश की कंपनी का विलय हो जाना लगभग तय हो गया|
इसका सीधा सा मतलब था कि कर्मचारियों की छटंनी की जायेगी| सुयश अपने आप में बोल उठा," बड़े फन्ने खाँ बने फिरते थे| अब जब आम ही नहीं रहेगा तो उसकी गुठली गिनने से क्या फायदा होगा?
पर सुयश यूँ शांत बैठ जाने वालो से था भी नहीं| महत्वाकांळी था वो ऊँची जगह पहुँच जाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता था चाहे वो काम के सिलसिले में हो या बॉस को रिझाने का|
बॉस सुयश से प्रभावित हो चले थे पिछले कुछ दिनो से| पर अब तो मामला अधर में लटक गया था| सुयश भी जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता था जिसका खामियाजा उसे बाद में भुगतना पड़े|
बॉस ने ही शायद सुयश का नाम अवनी को सुझाया था| एक बार की मुलाकात में सुयश अवनी को ठीक-ठाक ही लगा| सुयश का चेहरा-मोहरा खासा प्रभावित करने वाला था पर अवनी जमीन से जुड़ी लडकी थी और वो इंसान को उसके चेहरे से नहीं बल्कि उसकी फितरत से आंकती थी|
आखिरकार सुयश ने अवमी की कंपनी में जगह बना ही ली| पहला कदम तो नाप ही लिया था उसने| अवनी से पहली मुलाकात में इतना तो समझ ही गया था कि अवनी देखने में ही नहीं दिमाग से भी खुब सजग हैं| उसे अपने सांचे में ढाल लेना सुयश को इतना आसान न लगा|
अब तो शतरंज की बिसात बिछ गयी थी और उसे इस खेल में मजा आने लगा था| दोनो खिलाड़ी भी तो टक्कर के थे|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
सुमि की यथासंभव कोशिश रहती कि उसका किया कोई काम चाची को नाराज न कर दे|कभी चाची जानबुझकर उसका दुःख उभार देती| तब उसको यही लगता कि काश वो भी ...
-
नभ में पौ फटी और सूरज ने अपनी लालिमा बिखेर दी| सूमि को रात देर से नींद आयी थी|चाची की आवाज से वो चौंक कर उठ बैठी| वक्त देखा और जल्दी अपनी च...
-
रंग ससुराल आ पहली बार उसे अहसास हुआ कि चमड़ी के रंग के हिसाब से रिश्तो की मधुरता नापी जाती हैं| यहाँ उसे एक नया नाम मिला,"काली बहू ...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
रिश्ते दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|"जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो ज...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें