सुयश को पहले समझ ही नहीं आया कि ' मिशन अवनी' की शुरुआत करे कहाँ से| अवनी तक पहुँच का रास्ता इतना आसान भी नहीं जितना उसने सोच रखा था|
लगी लगायी नौकरी को लात मार उसकी कंपनी तो ज्वाइन नहीं कर सकता न|कारण क्या देता?
" मैडम आपकी सुदरंता पर रीझ पुरानी नौकरी को लात मार आया" सुयश ने अपने सनाल का खुद ही जवाब दे दिया| उसे अपनी सोच पर हंसी भी आई|
एक महीने बाद रास्ता खुद निकला| सुयश ने बॉस का मन में पैठ बनानी शुरु की थी| आखिर को एक वही तो उम्मीद नजर आती थी| उसकी मेहनत रंग लायी और बॉस ने कुछ कागजात उस कंपनी में पहुँचा आने को कहा|
सुयश को तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ कि उसके किस्मत के ताले यूँ खुलेगे| भाग्य भी साथ दे रहा था|
कागजात तो थे पर इतने महत्वपूर्ण भी नहीं कि उसको देने के लिए मैनेजर के केबिन का दरवाजा खटखटाना पड़ता| पर हाथ आया ऐसा सुनहरा मौका भी कैसे निकल जाने देता?
चपरासी को भी क्या अंदाज कि पेपर कितने जरुरी हैं और उन्हें मैडम को ही सौपंने के लिये सुयश को अंदर भेजना हैं या नहीं|
" मैडम को कहना कि मेरी कंपनी ने कुछ जरुरी कागजात सौंपने के लिये भेजा हैं" सुयश ने किसी मंजे खिलाड़ी की तरह दांव फेंका जो ठीक निशाने पर लगा|
थोड़ी देर में ही चपरासी ने आ कर उसे बाहर की बजाये अंदर का रास्ता दिखाया तो सुयश का दिल बल्लियों उछाले मारने लगा|
अवनी ने पेपर ले उसे देखा फिर सिर उठा उसे अजीब नजरो से देखा|
इससे पहले अवनी कुछ कहती सुयश ने ही अपनी सफाई दी," मैम पहली बार बॉस ने ये जिम्मेदारी भरा काम मुझे सौंपा हैं|इसलिए किसी और के हाथ पेपर देना मुझे ठीक नहीं लगा|"सुयश ने बहुत संयत स्वर में कहा|
" कितने दिने़ो से इस कंपनी में हो" अवनी ने पुछा|
" अभी तो केवल छः महीने ही हुए हैं मैम" सुयश हड़बड़ा गया|
" हूँssssss तभी" अवनी बोल उठी|
" मैम, क्या कुछ गल्त हो गया मुझसे" सुयश एकदम ही मासूम बन गया|
" गल्ती तो नहीं कह सकती मगर ये कागज इतने भी जरुरी न थे कि आपको इसके लिये मेरे केबिन में आने की जरुरत पड़ती| पर आप नये हैं| सो मे़ैं समझ सकती हूँ" अवनी ने कहा|
सुयश ने रुमाल निकाल माथे पर आयी पसीने की बुँदे पोंछी| उसकी इस हरकत पर अवनी के होठों पर मुस्कान तिर आयी|
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