अतिंम किस्त

बापू, बिसरन और गाँव वालो को देख मकान मालकिन हैरान हो गयी| जब सबके पीछे से बिरजू निकल कर सामने आया और जो उसका हूलिया देखा तो मालकिन को जरा देर नहीं लगी दो और दो चार करने में|
     हाथ आया इतना अच्छा बंधुआ मजदूर उन्हें मिलता कहाँ? बच्चवा उस वक्त रसोई का काम निपटा रहा था| उसे लगा कि बाहर कुछ हो हल्ला हो रहा हैं| आम तरह से बात करने पर शायद उसका ध्यान न भटकता पर आवाजे ऊँची उठती गयी| तब बच्चवा तनिक बाहर झांक भर लेने का लोभ नहीं छोड़ पाया|
  " यहाँ कोई बच्चवा नहीं रहता| जाओ जा कर कोई दूसरा घर खोजो|" मालकिन ने उन सब को टरका ही दिया था|
   तब बिरजू पर दो हाथ जमाने पर वो तोते की तरह बोल पड़ा कि यही वो घर हैं जहाँ वो बच्चवा को छोड़ गया था|
  " अरे!इस कमबख्त के बोलने से क्या होता हैं| एक बार कह तो दिया यहाँ कोई बच्चवा नहीं रहता" मालकिन  ने कह उनको वहाँ से हटाना चाहा| डर भी तो था कि कहीं बच्चवा वाकई सबके सामने हाजिर न हो जाए|
   वाकई बच्चवा केवल झांक लेने भर को आया और अपने बापू को देख चिल्ला पडा़" बापूssss, मैं बच्चवा| बापू मुझे ले चलो यहाँ से| माई के पास जाना हैं|"
मालकिन ने एकदम पैंतरा बदला "ऐसे कैसे ले जाओगे इसे? कीमत चुकायी हैं हमने इसकी"|
     कीमत सुन कर तो उन सबके होश उड़ गये| इतना पैसा कहाँ से भर पायेगे एकदम से?
  आज बच्चवा को ऐसी बेदर्द औरत के पास भी कैसे छोड़ जाये? क्या पता वो बच्चवा को कहीं और पहुँचा दे| इत्ते बड़े शहर मे गरीब की सुनेगा भी तो कौन?
  बापू ने माथा पीट लिया बिरजू पर विश्वास करने का ये नतीजा भुगता|मेहरारु की बात पर तनिक कान दिये होते तो आज ये नौबत न आती|
    तब यही तय हुआ कि बिरजू के साथ दो आदमी जा पैसो का इतंजाम करेगे और बापू, बिसरन और कुछ गाँव वाले यही पहरा देगे|
   आखिर को बिरजू का ही बोया था ये सब| पैसो से भी उसने खुब ऐश की थी|
      बच्चवा की जान हलक में फंसी थी| उसके लिए दिये पैसो का कर्ज तो वो कब का उतार चुका होगा? इतने दिन की बंधुआ मजूरी तो कर ली थी उसने| पर ऐसी घाघ औरत से मुँह जोरी करे और दांव उल्ट जाए ये इस बखत तो बच्चवा बिल्कुल नहीं चाहता था|
   पैसो का इंतजाम रात उतरने से पहले हो गया| पुलिस के पास ले जाने की जो तलवार उसके सिर पर जो लटक रही थी| फिर बात ज्यादा बढ़ने से पहले वो इसका निपटारा कप देना चाहता था| इस तरह वो पहली बार पकड़ में आया था इसलिए थोड़ा
खौफ बचा था अभी भी उसमें|
    बापू के पास आ बच्चवा जार जार रोया| ऐसे जैसे कितने दिनो की कैद के बाद छुटा हो|
  बिरजू को गाँव वालो ने गाँव निकाला दे दिया| ऐसे शातिर का गाँव में क्या काम? उस दिन के बाद से बच्चवा की शहर में जा बसने की इच्छा एकदम मर गयी|
बच्चवा अपने साथ और बच्चो को भी पढ़ लिख लेने को कहता हैं ताकि फिर कोई बिरजू उन्हें बेवकूफ न बना सके|

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