दूसरी किस्त

जब सोनल घर पहुँची उसी समय सांची का अॉटो आ कर रुका| सोनल की सांस में सांस आयी| आस-पास के घरो में सोनल ने ज्यादा घूस-पैठ नहीं बनायी थी| उनके ढेरो सवालो का सामना करना सोनल के बस का नहीं था|
  खाना गरम कर दो थाली में परोसा| आज तीसरी थाली भी लगा लेने को सोनल का मन कसमसा रहा था| साचीं तो खाने के बाद नीदं में गोते लगाने लगी और सोनल पुराने दिनो की यादो में|
  कितने बेफ्रिक और हसीन थे वे दिन|सोनल और सुमेर की पहली मुलाकात भी आमने-सामने की टक्कर से ही तो हुई थी| क्लास में आने और बाहर निकलने की जल्दी में टकराए तो हाथ से सामान की जगह किताबे बिखरी थी| तब भी दोनो की नजरे टकरायी थी और तब भी सुमेर उसी बेबाक अंदाज में सोनल को एकटक देखता रहा था| उस समय क्लास में उठे जोरदार ठहाको ने उनका ध्यान बांटा था|
    सब सोच सोनल आज अपनेआप से ही मुस्कुरायी थी| अपनी नदानी और रुप के घंमड ने उसका सब कुछ तिरोहित कर दिया था|
   सोनल जैसी अपार सुदंरी अपनी पढ़ाई से ज्यादा अपने रुप के कारण चर्चित थी| जाने कितने लड़के उससे दोस्ती करना चाहते थे| पर उसका मन तो सुमेर पर आ अटका था|
   सुमेर पढ़ाई में तो अव्वल था ही वो प्रभावशाली व्यक्तित्व का भी मालिक था| सोनल भी कहाँ बच पायी थी उसके प्रभाव से| मन से हारी थी| सुमेर और सोनल की उस दिन की टक्कर से उनकी बढ़ती मुलाकातो का सिलसिला कब प्यार में बदला दोनो को खबर न हूई|
      सुमेर के घर की आर्थिक स्थिती इतनी मजबूत न थी| घर के लोगो की उम्मीद केवल सुमेर पर ही टिकी थी|पर सोनल के साथ ऐसा न था| उसके पिता शहर के प्रभाव शाली लोगो में गिने जाते| पैसो की कमी न थी|  इनके चलते सोनल में दंभ भर गया था| सुमेर का प्यार उसे जमीन पर रखता| पर कितने दिनो तक?
     सुमेर ने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया| और पूरे मन से पढ़ाई में जुट गया| सोनल कोे भी एक प्राइवेट कंपनी में अपने पिता के प्रभाव के चलते एक बढ़िया नौकरी  मिल गयी|
   जब सुमेर का सिविल सेवा के लिए चयन हुआ तो कितना खुश था वो उस दिन| सारा मनचाहा मिल गया हो जैसे| सोनल के पिता ने दोनो के विवाह में तनिक देर न की| हाथ आए इतना बढ़िया दामाद मिलता कहाँ?
     शादी के बाद के एक साल तो जैसे पंख लगा उड़ गये|सुमेर पहली पोस्टिग दिल्ली में ही थी| पर दूसरी पोस्टिग नैनिताल कर दी गई|तब सोनल और सुमेर का पहला मनमुटाव सामने आया| दिल्ली जैसी जगह में रहने की आदी सोनल, नैनिताल जैसी मोहक वादियों में भी उसका मन नहीं रमा|
   प्यार की खुमारी उतरने लगी थी उसकी|

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