सुमिञा से विदा लेकर निकलना निम्मी का मन भारी कर गया था | काश भैया होते तो उसकी राह थोड़ी आसान बन जाती| अभी माँ-पापा को छोड़ यूँ चले जाने उसे उदास कर रहा था|
दूसरे शहर तो आ गयी पर उसका मन नहीं रम पाया| एक तो नये शहर का अजनबीपन और दूजे माँ-पापा की चिंता उसका सूकुन ले गये थे|निम्मी जल्दी से जल्दी घर ले माँ-पापा को यहाँ ले आना चाहती थी| अभी तो वो working women's hostel में रह अपना काम चला रही थी|
उस रोज जब वो अॉफिस से निकली तब आसमान काले बादलो से घिर गया था| बूँदा-बांदी शुरु हो चुकी थी| निम्मी जल्दी कदम बढ़ा बारिश तेज हो जाने से पहले मजिंल तक पहुँच जाना चाहती थी| पर रास्ते में ही बारिश तेज हो गयी|वो आड़ में खड़ी रिक्शा का इंतजार करने लगी| पर ऐसे बरसते पानी में रिक्शा भी कहाँ मिलता? सड़क सुनसान हो गयी थी| निम्मी को डर भी लग रहा था| इतने में सामने से एक रिक्शा आता दिखाई पड़ा| करीब आने पर पता चला उसमें कोई बैठा हैं| अब क्या करे की सोच वो आड़ लेने के लिए पलटी ही थी कि अपना नाम सुन चौंक उठी| घर के लोगो के अलावा ये नाम और कौन ले सकता हैं?वो वापस पलटी तो रिक्शे से भैया का चेहरा झांकता नजर आया|
" तु यहाँ इस खराब मौसम में अकेली क्या कर रही हैं?" भैया पुछ रहे थे|
निम्मी को भैया का यूँ अचानक ऐसे माहौल में मिल जाना कितना सुकून दे गया इसको शब्दो में उकेरना कठिन हैं|
"आप यहाँ कैसे? मैं तो दो महीने से इस शहर में हूँ" निम्मी बोल उठी|
" मैं काम के सिलसिले में यहाँ आया हूँ| शायद यहाँ जल्दी तबादला हो जाए|" भैया ने जब ये कहा तो निम्मी को खुशी हूई या नहीं निम्मी को खुद अहसास न हुआ| समय ने शायद भावनाँए भी लील ली थी|
भैया का जो उपेक्षित व्यहवार बना था वो बहूत ज्यादा सोच लेने ही नहीं देता था|
पर आज जो इतने दिनो बाद भैया से इतनी बात हूई तो लगा कि इतने दिनो के फासले कभी थे ही नहीं| वो सब एक बुरा सपना था जो बीत गया|भैया की बातो से लगा कि उन्होने जो फासले बना लिये थे वे उनको भीतर तक कहीं कचोटते रहते थे|कुछ खो देने का अहसास हमेशा हावी रहा|
निम्मी को ये सोच कर बहूत राहत मिली कि आज भी भैया के मन के किसी कोने में वो सब एक बंद दरवाजे के पीछे आज भी मौजूद हैं| यादो को कैसे निचोड़ कर फेंका जा सकता था?
भैया उसे होस्टल के गेट तक पहुँचा गये| निम्मी को दूसरे दिन पता चला कि भैया अगले छः महीने का उसका किराया भर गये हैं|
क्या निम्मी ने अपने भाई को फिर पा लिया?
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