आज खड़ी फिर उस मंका के नीचे ,
जहाँ मैंने अपना बचपन जीया था,
पहले खट्टे मीठे से पल हुआ करते थे,
आज वो सारी यादे मीठी लगती हैं|
दहलीज पर ही लरज उठे मेरे पैर,
जो अक्स जमा थे बचपन के जेहन में,
कही उसकी तस्वीर न बदले|
ये मकां जिसका जर्रा-जर्रा बसा हैं मेरी रुह में,
सारा उतरता जा रहा हैं आज भी|
उस कमरे में रखी वो रंग उखड़ती अलमारी,
जिसकी किसी दराज में पीले पड़ते पन्ने,
जो मेरा बचपन समेटे हैं अपने में,
जिन पर उभरे कितने चेहरे संमा गये हैं समय के गर्त में,
पलंग की तिपाई पर रखा वो पानी का जग,
वो खिड़की-दरवाजो को ढापते सुनहरे परदे,
क्या सब वैसा ही होगा जैसा छोड़ आयी थी अरसा पहले,
दहलीज से ही मेरे कदम वापस हो लेते हैं,
जो तस्वीर टंगी हैं मेरे मन में बचपन की,
वही बसी रहे मेरे मन के कोनो में,
उम्र तमाम होने तक मेरी भी|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
नेहा ने तबादले से होने वाली टुटन को दिल से महसूस किया था| जब पैर जमने लगते और दोस्तो की ऱेहरिस्त लंबी होने लगती तब वहाँ से उखड़ किसी दूसरी ...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी सुधीजनों को शुभकामनाएं। इस अवसर पर अपने कुछ हाइकु पटल पर प्रेषित कर रही हूँ। हिंदी ही भाषा विश्व पटल पर मान बढ़ाये...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
जेवर "जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
लकीरे राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर| पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू न...
-
गुरु मंत्र मैं अपनी ही बहन का फोन "इग्नोर"करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय ...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें