फकत हमसफर बनने की ख्वाहिश की थी
बेरुखी देखी उनकी अपने हर गुनाहे रुसुल में|
जितनी उनकी उल्फत गहरी थी,
इश्क हमारा उतना ही जूनुनी था|
आपके हर अल्फाज का अहसास था मुझे,
दिल के हर जज्बात का अहसास था मुझे,
न पुछा कभी दिल से दूर करने की वजह,
हालात की हर सिलवटो का अहसास था मुझे|
काश कोई इस कदर मेरे हालात को समझे,
मुस्कुराऊ भी तो,उसके पीछे की वजह को समझे|
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