सुना मेरी हर बात अजीम हैं तुम्हें,
आँखो का पानी हो या दिल का दर्द|
  

कतरा कतरा उतार लूँ तुझे,
हाथो की लकीरो में उकेर लूँ तुझे,
माना नहीं मेरे जज्बात की कोई कीमत,
फिर भी,
जिदंगी को जिदंगी सी बसा लूँ तुझे|
 

आँसू बन मेरी आँखो में रहता हैं,
अजीब शख्स हैं पानी के घर में रहता हैं|

दर्द भी देते हैं बेपनाह,
और,
पुछते भी हैं जख्म गहरा तो नहीं|


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