सातंवी किस्त

शाम को आते साथ रोमी ने रवि के कान में सारी बात उड़ेल दी|जो रोमी के स्वभाव के विपरीत था| पर उससे रवि को चाय-पानी देने तक रुक लेने का सब्र न हुआ|
" आज तो गजब हो गया"रोमी के मुँह से जब ये निकला तो रवि समझ गया कि मामला गंभीर हैं|
  रोमी बेटे के लिए कुछ ज्यादा चिंतित थी|रवि भी परेशान हुआ मगर ऐसी  बातो के चलते रोमी रवि पर दूसरा घर ले लेने का दवाब बनाना शुरु कर देगी इसका रवि को अहसास था|
   बड़ी मुशिकिलो से तो ये मकान हाथ आया था और पैर अभी जमना शुरु ही हुए थे|
   अभी इस घर पर उनका दाना-पानी लिखा था| रोमी ने फिर दोबारा घर बदल लेने की बात नहीं उठायी|उसे भी अहसास तो था कि घर बदल लेना इतना आसान नहीं|
      उस काडं के बाद घर में खामोशी पसर गयी|बेटे ने बहू के माँ-बाप को बुला लेने की पुरजोर कोशिश की| पर आंटी ने मना कर दिया| घर की बात घर की चारदीवारी के बाहर जाए ये आंटी को मजूंर न था| वैसे भी बेटे ने ही अपनी हरकतो के इतने झंडे गाड़े थे| उस फेहरिस्त को और बढ़ाना आंटी को गवारा न था|
    रोमी को आंटी-अंकल को देख बेतरह तकलीफ होती|अच्छे लोगो को इतने कष्ट क्यों देता हैं भगवान?
    बेटे को बीवी पर रोब डाल लेने का सुनहरा अवसर मिल गया था| आंटी-अंकल के न होने पर बखुबी अंजाम देता| पर बीवी भी दूसरी मिट्टी से बनी थी| दब कर रहना उसकी फितरत में न था|
  एक दिन अंकल-आंटी न थे घर पर तब बेटे की आवाज सुनायी पड़ी," मीता, ये बाहर रखा सामान क्या तुम्हारा बाप आयेगा उठाने"|
   बहू ने भी उसी सुर में कहा, " तुम्हारा बाप नहीं उठा सकता क्या जो ' bulldog' की तरह सारे दिन बाहर बैठा रहता हैं?"
    बेटे-बहू की एक दूसरे के घर वालो के लिए इतनी नफरत रोमी के लिए नयी चीज थी|दोनो की भाषा का स्तर इतना गिरा हुआ होगा ये रोमी ने पहली बार सुना और उसी दिन उसने ठान लिया की अब उसे नये मकान मालिक ढुंढने ही पड़ेगे|
      पढ़े-लिखे कहे जाने वाले लोग अनपढ़ो से भी ज्यादा निम्न स्तर को छु जाते हैं| ये एक कठोर अनुभव था रोमी के लिए|

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